नई दिल्ली।। पाकिस्तान ने 1971 युद्ध के दौरान जैसलमेर से 120 किमी दूर लौंगेवाला पोस्ट के करीब तनोट माता के मंदिर पर हजारों गोले बरसाए थे। लेकिन उनके यह गोले फटने के बजाय खिलौने बनकर रह गए।
तनोट माता के मंदिर में ये गोले आज भी इस बात के गवाह हैं कि पाकिस्तानी सैनिकों के नापाक इरादों को कैसे तनोट माता के प्रताप ने मिट्टी में मिला दिया था। भारतीय जवानों में आस्था का प्रतीक बन चुका तनोट माता का मंदिर रोचक किस्सों और कहानियों को अपने भीतर समेटे हुए है।
आज इस मंदिर में आप बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स (बीएसएफ) के जवानों को पूजा करते हुए देख सकते हैं। मंदिर की देखभाल से लेकर उसकी साफ-सफाई और डेवलपमेंट का सारा काम बीएसएफ के जवान ही देखते हैं। अब यहां एक तनोट चेक पोस्ट भी बनाया जा चुका है।
आपको 1971 का भारत-पाक युद्ध तो याद होगा। इस ऐतिहासिक युद्ध की शुरुआत चार दिसंबर से हुई और पाक की करारी हार के बाद यह युद्धविराम 16 दिसंबर को हुआ था।
आज इस मंदिर में आप बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स (बीएसएफ) के जवानों को पूजा करते हुए देख सकते हैं। मंदिर की देखभाल से लेकर उसकी साफ-सफाई और डेवलपमेंट का सारा काम बीएसएफ के जवान ही देखते हैं। अब यहां एक तनोट चेक पोस्ट भी बनाया जा चुका है।
आपको 1971 का भारत-पाक युद्ध तो याद होगा। इस ऐतिहासिक युद्ध की शुरुआत चार दिसंबर से हुई और पाक की करारी हार के बाद यह युद्धविराम 16 दिसंबर को हुआ था।

