कैसे सुब्रमण्यम स्वामी ने "नेशनल हेराल्ड" केस से पूरी कांग्रेस पार्टी को दौड़ता कर दिया?

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कैसे सुब्रमण्यम स्वामी ने "नेशनल हेराल्ड" केस से पूरी कांग्रेस पार्टी को दौड़ता कर दिया?

क्या है "नेशनल हेराल्ड" केस जिसे लेकर पुरे देश में कांग्रेसी हल्ला मचा रहे है?
   नेशनल हेराल्ड मामले में सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष दिल्ली में पेशी है. इस मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और राहुल गांधी को ED ने समन जारी किया था. सोनिया गांधी को 8 जून को और राहुल गांधी को 2 जून को पूछताछ के लिए बुलाया गया था. लेकिन राहुल गांधी उन दिनों देश में नहीं थे, इसलिए उन्होंने ईडी से समय बढ़ाने की मांग की थी. इस मांग को स्वीकार करते हुए ईडी ने उन्हें 13 जून को बुलाया. वहीं सोनिया गांधी कोविड पॉजिटिव होने के चलते अस्पताल में भर्ती हैं. लिहाजा वह ईडी के समक्ष पेश नहीं हो सकीं.  
    ईडी, ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में मनी लॉन्ड्रिंग संबंधी जांच कर रहा है. भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत पर नेशनल हेराल्ड केस की जांच शुरू की गई थी. साल 2012 से यह मामला चल रहा है. आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने यंग इंडियन लिमिटेड कंपनी के माध्यम से नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स का अधिग्रहण, घालमेल के साथ पूरा किया और करीब 5 हजार करोड़ की संपत्ति अपनी बना ली. आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला। 
एसोसिएटेड जर्नल्स से हुई शुरुआत
    पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 में एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी AJL को बनाया. लेकिन AJL पर कभी नेहरू का मालिकाना हक नहीं रहा. इसे 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे. इनमें से कई बड़े नेता भी थे. AJL का गठन एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में भारतीय कंपनी अधिनियम 1913, के अंतर्गत विभिन्न भाषाओं में समाचार पत्रों के प्रकाशन के लिए किया गया था. AJL ने अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित करने शुरू किए. इनमें से नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन 1938 में शुरू हुआ. 1962-63 में 0.3365 एकड़ जमीन दिल्ली-मथुरा रोड पर 5-A बहादुर शाह जफर मार्ग पर AJL को आवंटित की गई. 10 जनवरी 1967 को प्रेस चलाने के लिए भवन निर्माण के लिए भूमि और विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) द्वारा AJL के पक्ष में स्थायी लीज डीड बनाई गई. इसमें कहा गया कि बिल्डिंग का और कोई इस्तेमाल नहीं होगा.
2008 में 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज
    साल 2008 आते-आते AJL पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया. इसके बाद AJL ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं होगा. अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बाद AJL ने प्रॉपर्टी बिजनेस में एंट्री की. वह दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में बिजनेस कर रही थी. 22 मार्च 2022 से मोतीलाल वोरा इसके चेयरमैन व एमडी हैं. इसके बाद साल 2010 में यंग इंडियन नामक कंपनी का गठन हुआ और 13 दिसंबर 2010 को राहुल गांधी को यंग इंडियन का डायरेक्टर बनाया गया. 22 जनवरी 2011 को इसके बोर्ड में सोनिया गांधी शामिल हुईं.
    प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड (National Herald) मामले में कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को समन जारी किया है. ईड़ी ने राहुल गांधी को 2 जून और सोनिया गांधी को 8 जून को पूछताछ के लिए बुलाया है. बता दें, इनपर पैसों की हेराफेरी करने का आरोप है. हालांकि, ये मामला अभी का ही नहीं है. ये कई साल से चल रहा है. इस नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार पर कई गंभीर आरोप हैं.
    गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने एसोसिएटेड जर्नल्स की 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति के लिए 50 लाख रुपये का भुगतान करके हेराफेरी करने का आरोप है.
यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) और एसोसिएटेड जर्नल्स (AJL)
    साल 2010 में यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) की स्थापना हुई थी. राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने मिलकर कंपनी में 76 फीसदी हिस्सेदारी अपने नाम की थी. और बची हुई 24% की हिस्सेदारी कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस के पास समान रूप से थी. YIL का रजिस्टर्ड ऑफिस आईटीओ, नई दिल्ली में हेराल्ड हाउस में था. एसोसिएटेड जर्नल्स (AJL) नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशक था. बता दें, एजेएल की स्थापना 1937 में हुई थी. पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 5,000 अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ फर्म की शुरुआत अपने शेयरधारकों के रूप में की थी.
कांग्रेस की इसमें क्या भूमिका है?
    दरअसल, नेशनल हेराल्ड अखबार घाटे में चल रहा था बस यहीं से कांग्रेस की तस्वीर सामने आती है. कांग्रेस ने AJL को 90 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त लोन देने का फैसला किया. हालांकि, इस कोशिश के बाद भी अख़बार अपने पैरों पर फिर से खड़ा नहीं हो पाया.
घोटाला क्या है?
    चूंकि एजेएल 90 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त लोन का भुगतान करने की स्थिति में नहीं था, इसलिए उन्होंने अपनी सारी हिस्सेदारी यंग इंडिया लिमिटेड को दे दी, जो गांधी परिवार की थी. इसके लिए वाईआईएल ने केवल रु. 50 लाख रुपये ही दिए. बस, पूरा भुगतान न करने की वजह से ही गांधी परिवार का नाम इसमें आया. गांधी परिवार के खिलाफ ये मामला है कि उन्होंने केवल 50 लाख रुपये का ही भुगतान किया है. जबकि एजेएल 2000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाली कंपनी है. उन्होंने केवल इतने ही रुपये में इस कंपनी को अपने अधीन कर लिया.
सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में किया था केस दर्ज
    साल 2012 में भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने गांधी परिवार के कथित धोखाधड़ी के खिलाफ मामला दर्ज किया. सुब्रमण्यम स्वामी ने यह आरोप ही लगाया कि कांग्रेस ने एजेएल को जो लोन दिया वह अवैध था क्योंकि राजनीतिक दलों को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए पैसे उधार देने की अनुमति नहीं है.
2012 के बाद क्या हुआ?
    2014 में, मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपियों को ये कहते हुए समन जारी किया कि सबूत उनके खिलाफ हैं. जिसके बाद अगस्त 2014 में, ईडी ने अपनी छानबीन शुरू की. उन्होंने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू की कि क्या इसमें कोई मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है या नहीं?
    इतना ही नहीं, सितंबर 2015, ईडी ने फिर से जांच शुरू की. जिसके बाद दिसंबर 2015 में पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी को जमानत दी. हालांकि, जब कार्यवाही को रद्द करने के लिए अपील की गई तो फरवरी 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया. इसके बाद ईडी एक बार फिर से एक्शन में आई और मई 2019 में ईडी ने नेशनल हेराल्ड की 16.38 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की.
   बता दें , मई 2022 में ईडी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नोटिस जारी किया गया था.
यंग इंडियन में सोनिया और राहुल की ​कितनी हिस्सेदारी
   दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि पहले कांग्रेस ने AJL को 90.25 करोड़ रुपये का ब्याज फ्री लोन दिया. इस लोन को चुकाया नहीं गया. उसके बाद नवंबर 2010 में यंग इंडियन लिमिटेड नाम की एक कंपनी शुरू की गई. 50 लाख रुपये की पूंजी के साथ शुरू की गई इस कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की हिस्सेदारी 38-38 फीसदी है. कंपनी को खड़ा करने का मकसद AJL पर मौजूद 90.25 करोड़ रुपये की देनदारियां उतारना था. यंग इंडियन ने साल 2011 में एजेएल के लगभग सभी शेयर और प्रॉपर्टी खरीद लिए और इस तरह 5000 करोड़ रुपये के एसेट कांग्रेस के हो गए. AJL के कमर्शियल एसेट्स का अधिग्रहण यंग इंडियन का गठन होने के तीन माह के भीतर कोई टैक्स और स्टैंप ड्यूटी चुकाए बिना ही पूरा कर लिया गया था.
सुब्रमण्यम स्वामी ने क्या लगाए हैं आरोप
    साल 2012 में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर की. नवंबर 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी ने जो आरोप लगाए, उनमें एक आरोप यह भी था कि सोनिया और राहुल गांधी ने जालसाीजी करके AJL को अपना बना लिया. साथ ही नेशनल हेराल्ड, कौमी आवाज के पब्लिकेशन राइट्स भी हासिल कर लिए. इसके लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट प्रॉपर्टी भी पा लीं, जबकि ये प्रॉपर्टी सरकार द्वारा केवल अखबारों की पब्लिशिंग के मकसद से दी गई थीं. लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इनका इस्तेमाल लाखों रुपयों की किराया आय के साथ पासपोर्ट कार्यालय चलाने के लिए किया.
     स्वामी की शिकायत में यह भी का गया है कि 26 जनवरी 2011 को AJL ने 90 करोड़ रुपये के अनसिक्योर्ड लोन को जीरो ब्याज पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी से यंग इंडियन को ट्रान्सफर करने को मंजूरी दी. साथ में 10 रुपये प्रति शेयर की कीमत वाले कंपनी के सभी 9 करोड़ शेयर भी यंग इंडियन को ट्रान्सफर कर दिए गए. स्वामी का कहना है कि किसी राजनीतिक पार्टी के लिए किसी कमर्शियल उद्देश्य को लेकर उधार देना, आयकर कानून के नियमों के तहत गैरकानूनी है. लिहाजा स्वामी ने सीबआई से मामले की जांच की अपील की.
कांग्रेस की सफाई और ED की जांच
     2 नवंबर 2012 को कांग्रेस की ओर से कहा कि दिया गया लोन, केवल नेशनल हेराल्ड न्यूजपेपर के रिवाइवल के लिए था. इस चीज में कोई वाणिज्यिक हित नहीं था. 2014 में ED ने इस केस की जांच शुरू की. ED यह पता लगाना चाहती थी कि क्या इस केस में किसी तरह की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है. ED की जांच चलती रही. 26 जून 2014 को अदालत ने सोनिया और राहुल को आरोपी के रूप में अदालत में समन किया. इसके बाद सितंबर 2015 में ED ने फिर से इस मामले की जांच शुरू की. 19 दिसंबर 2015 को सोनिया और राहुल गांधी इस मामले में पटियाला कोर्ट में पेश हुए और उन्हें जमानत मिल गई. मामले की सुनवाई चलती रही. अक्टूबर 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने AJL को बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस को खाली करने का आदेश दिया, यह कहते हुए कि इस बिल्डिंग का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्य के लिए हो रहा है. इसमें न तो कोई प्रिटिंग हो रही है और न ही पब्लिशिंग, जबकि 1962 में यह जमीन इसी मकसद से आवंटित की गई थी.
    5 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी. साल 2019 में ही कोर्ट ने फैसला दिया कि यंग इंडियन मामले में 100 करोड़ रुपये टैक्स का मामला फिर खुलेगा. यंग इंडियन को नॉट फॉर प्रॉफिट कंपनी बताया गया था और इस पर इनकम टैक्स छूट रजिस्ट्रेशन लिया गया था. लेकिन बाद में जांच में पाया गया कि जिस चैरिटेबल मकसद से कंपनी को टैक्स में छूट मिल रही है वह मकसद पूरा नहीं हो रहा। एजेएल की गतिविधियां चैरिटेबल ट्रस्ट की श्रेणी में नहीं आती हैं. 1 जून 2022 को ED ने नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया और राहुल गांधी को हाजिर होने का नोटिस भेजा. ईडी ने कुछ समय पहले ही इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन बंसल से पूछताछ की थी.
खुद की ही सम्पति खुद को ही बेचने का अजब खेल
   नेहरू जी ने नेशनल हेराल्ड नामक अखबार 1930 में शुरू किया। धीरे-धीरे इस अखबार ने 5000/- करोड़ की संपत्ति अर्जित कर ली। आश्चर्य की बात ये है कि इतनी संपत्ति अर्जित करने के बावजूद भी सन् 2000 में यह अखबार घाटे में चला गया और इस पर 90 करोड़ का कर्जा हो गया।
   "नेशनल हेराल्ड" की तत्कालीन डायरेक्टर्स, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और मोतीलाल वोरा ने, इस अखबार को यंग इंडिया लिमिटेड नामक कंपनी को बेचने का निर्णय लिया।
कौन थे यंग इंडिया के डायरेक्टर्स और क्या थी डील
   अब मज़े की बात सुनो, यंग इंडिया के डायरेक्टर्स थे, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, ऑस्कर फेर्नाडीज़ और मोतीलाल वोरा।
  डील यह थी कि यंग इंडिया, नेशनल हेराल्ड के 90 करोड़ के कर्ज़ को चुकाएगी और बदले में 5000 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति यंग इंडिया को मिलेगी। इस डील को फाइनल करने के लिए नेशनल हेराल्ड के डायरेक्टर मोती लाल वोरा ने "तत्काल" यंग इंडिया के डायरेक्टर मोतीलाल वोरा से बात की, क्योंकि वह अकेले ही, दोनों ही कंपनियों के डायरेक्टर्स थे।
कैसे चला लॉन का खेल 
   अब यहाँ एक और नया मोड़ आता है। 90 करोड़ का कर्ज़ चुकाने के लिए यंग इंडिया ने कांग्रेस पार्टी से 90 करोड़ का लोन माँगा। इसके लिये कांग्रेस पार्टी ने एक मीटिंग बुलाई जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और कांग्रेस पार्टी के महासचिव शामिल हुए और यहाँ वरिष्ठ लोग कौन थे? वही सोनिया, राहुल, ऑस्कर और मोतीलाल वोरा।
   कांग्रेस पार्टी ने लोन देना स्वीकार कर लिया और इसको कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ने पास भी कर दिया और यंग इंडिया के डायरेक्टर मोतीलाल वोरा ने ले लिया और आगे #नेशनल हेराल्ड के डायरेक्टर मोतीलाल वोरा को दे दिया।
इसी को कहते हैं राख के ढेर से महल खड़ा कर लेना
   अब कांग्रेस पार्टी ने एक मीटिंग और बुलाई जिसमें सोनिया, राहुल, ऑस्कर और वोरा साहब सम्मलित हुए। उन्होंने मिलकर यह तय किया कि नेशनल हेराल्ड ने आज़ादी की लड़ाई में बहुत सेवा की है इसलिए उसके ऊपर 90 करोड़ के कर्ज़ को माफ़ कर दिया जाए और इस तरह 90 करोड़ का छोटा सा कर्ज माफ़ कर दिया गया और इस तरह से यंग इंडिया जिसमें 36 प्रतिशत शेयर सोनिया और 36 प्रतिशत राहुल के हैं और शेष शेयर 12 प्रतिशत ऑस्कर और 12 प्रतिसत वोरा साहब के हैं, को, 5000 करोड़ की संपत्ति मिल गई, जिसमें, एक 11 मंज़िल बिल्डिंग जो बहादुर शाह जफ़र मार्ग दिल्ली में और उस बिल्डिंग के कई हिस्सों को अब पासपोर्ट ऑफिस सहित कई ऑफिसेस को किराये पर दे दिया गया है व देश के अन्य भागों में भी नेशनल हेराल्ड की सम्पत्ति थी। फिलहाल राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी इसी नेशनल हेराल्ड केस में 5000 करोड़ के घोटाले में जमानत पर चल रहे हैं। 

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