वहीं जावड़ेकर का कहना है कि जानवरों के हाथों फसल खराब होने से परेशान किसानों ने इसकी मांग की थी, जिसके बाद जानवरों को मारने की अनुमति दी गई है. मेनका ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय हर राज्य को लिख रहा है कि आप बताओ किसको मारना है. हम इजाजत दे देंगे. बंगाल में उन्होंने कह दिया कि हाथी को मारें. हिमाचल को कहा कि हाथी को मारें. गोवा में कह दिया कि मोर को. अब कोई जानवर नहीं छूटा. चांदपुर में इतना अनर्थ हो रहा है कि उन्होंने 53 जंगली सुअर मारे हैं. अभी और 50 की इजाजत दी है. इस घटना के लिए पर्यावरण मंत्रालय जिम्मेदार है. पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि किसने क्या कहा उस प्रतिक्रिया नहीं देता. लेकिन कानून के आधार पर किसान की फसल का नुकसान होता है और राज्य सरकार प्रस्ताव देती है तो हम राज्य सरकार को मंजूरी देते हैं. ये केंद्र सरकार का नहीं राज्य सरकार का काम है. इसके लिए पहले से ही कानून बना हुआ है. एक अनुमान के मुताबिक मोकामा टाल में 10 हजार से ज्यादा नीलगाय हैं. ये नीलगाय हर साल लाखों रुपए की फसल बर्बाद कर देते हैं.
बिहार में 3 दिन में मारी गईं 200 नीलगाय, मेनका-जावड़ेकर आमने-सामने
7:38 PM
