गुरमीत रोज शाम अपने घर से खाना लेकर निकलते हैं और पीएमसीएच के लावारिस वार्ड के मरीजों को खुद ही खिलाते हैं. और ऐसा वो पिछले 25 सालों से करते आ रहे हैं.
ज्ञात हो कि पीएमसीएच का लावारिस वार्ड वो जगह है जहां डॉक्टर भी जाने से कतराते हैं. ऐसे में गुरमीत का खुद ही इस तरह का काम करना मानवता के लिए एक मिसाल है.
गुरमीत की अपनी कहानी भी कम फिल्मी नहीं है. उनके पिता देश की आजादी के पहले पकिस्तान से पटना आय्रे थे और बड़ी मेहनत से यहाँ अपना व्यवसाय जमाया.
उनके परिवार में कोई फिजूलखर्ची नहीं होती बल्कि उस पैसे को बचाकर वो इन लोगों की सेवा में लगाते हैं. गुरमीत के 5 बेटे हैं और सबका अलग अलग व्यवसाय है और जिस दिन वो खुद नहीं जा पाते उस दिन उनके बेटे जाकर ये खाना खिलाने का काम करते हैं.
उन्होंने अब तक अपनी 25 साल की सेवा में ऐसे करीब 100 लोगों की सेवा कर उन्हें अपने घर पहुंचाया है. वो कहते हैं कि किसी की बेटी की शादी हो तो वो बेहिचक आकर उनसे मदद मांग सकता है.
उनके इस प्रयास की सराहना पूर्व डीजीपी आनंद शंकर भी कर चुके हैं. देश भी गुरमीत के जज्बे को सलाम करता है.
