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अभिनव ऐसे गायों और बैलों को अपने घर लाकर उनका इलाज़ करते हैं, जो किसी हादसे में घायल या चोटिल हो जाते हैं. उनके इस प्रयास से जहाँ एक ओर कई गायें पूरी तरह से स्वस्थ्य हो जाती हैं, तो दूसरी ओर कई गायों की मृत्यु भी हो जाती है. इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली गायों को ‘गौ-लोक गमन’ नाम देकर, हिंदू रीति-रिवाज़ के साथ अभिनव उनका अंतिम संस्कार कर देते हैं.
अच्छी बात यह है कि अभिनव के इस कार्य में उनका पूरा परिवार साथ देता है. जब अभिनव से सवाल किया गया कि इस कार्य में उसका भविष्य क्या है और इतनी गौवंश का खर्चा कहां से चलता है तो उनका जवाब था कि “जिसने मुझे इस नेक कार्य की जिम्मेदारी दी है वो ही इसकी पूर्ति भी करता है.
