रेलवे ने ऐसे काटी यात्रियों की जेब, फिर भी नहीं भरा पेट

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रेलवे ने ऐसे काटी यात्रियों की जेब, फिर भी नहीं भरा पेट

    भारतीय रेल की डायनामिक प्राइसिंग यात्रियों के लिए भले ही मुसीबत हो लेकिन साल 2017-18 में रेलवे ने इससे 860 करोड़ रुपये यात्रियों से कमाए हैं. भारतीय रेल ने सितंबर 2016 में राजधानी, शताब्दी और दूरंतो ट्रेन में फ्लेक्सी फेयर सिस्टम लागू किया था.
    साल 2017-18 के दौरान रेलवे ने यात्रियों से कुल 50,000 करोड़ की कमाई की है जो पिछले साल 47,000 करोड़ थी. इस दौरान भारतीय रेल के यात्रियों की संख्या में भी पिछले साल की तुलना में बढ़ोत्तरी हुई है. जिसमें सब अर्बन ट्रेनों में 2 फीसदी और मेल-एक्सप्रेस में 6.32% मुसाफ़िर बढ़े हैं.
     भारतीय रेल के सालाना यात्रियों की संख्या 826 करोड़ से बढ़कर 868 करोड़ से ज़्यादा हो गयी है. हालांकि कोहरे और सुरक्षा कारणों से दिए गए ब्लॉक की वजह से साल 2017-18 में रेलवे ने ट्रेनों के 72690 फेरे रद्द किए. जबकि पिछले साल 48762 फेरे रद्द किए गए थे. रेलवे ने इस साल मालदा- दीघा, पटना-बांका, मैसूर-बंगलुरू और हावड़ा-बालाघाट के बीच कई मेल एक्सप्रेस ट्रेन के रिज़र्व कोच में चेयर कार यानी सीटिंग अरेंजमेंट कर बड़ी संख्या में यात्रियों को अपनी ओर खींचा है.
    भारतीय रेल की आर्थिक सेहत काफी बिगड़ हुई है और उसका ऑपरेटिंग रेशियो 97 हो गया है. यानी रेलवे 100 रुपये कमाने में 97 रुपये का खर्च करता है. वहीं ट्रेनों की लेट-लतीफी में भी वह काफी बुरी हालत में है. फिलहाल भारतीय रेल की महज 65 फ़ीसदी ट्रेनें समय पर चल पा रही हैं. यह आंकड़ा पिछले साल 72 फ़ीसदी का था. रेलवे ने साल 2018-19 को 'ज़ीरो ईयर' घोषित किया है. यानी भविष्य में रेलवे के हालात की तुलना के लिए बेस ईयर 2018-19 होगा.
   माना जाता है कि रेलवे की हालत कई मायनों में फिलहाल अपने निचले स्तर पर है. इसलिए भविष्य के किसी भी आंकड़ें की तुलना अगर आज से की जाएगी तो रेलवे में सुधार ही दिखेगा.



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