रामवंश का आखिरी राजा कौन था ?

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रामवंश का आखिरी राजा कौन था ?

   महाभारत युद्ध के समय रामजी के वंश के राजा बृहद्वल थे और कोरवों कि तरफ से पांडवों के विरुद्ध युद्ध लड़े थे. इनको अभिमन्यु ने युद्ध में हराकर वध कर दिया था. यह राम जी के रघु कुल में सूर्यवंश कि सौवी पीढ़ी में थे. यही कौशल के राजा थे. यह समय कलयुग के शुरू होने का था और द्वापर के समाप्ति का था. युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के समय भीम ने इनको हराया था और इन्होने महाराज युधिष्ठिर को भेंट डि थी. यज्ञ में सहयोग किया था.
    राजा राम के पुत्र कुश के राज्यारोहण के समय को त्रेता कि समाप्ति और द्वापर के शुरू का माना जाता है. कुश ब्रह्मा जि की पाचश्विन पीढ़ी में थे. राम 49 वि पिफी में थे. श्री राम जि के पुत्र लव को उन्होंने लाहौर का राज्य मिला. लाहौर लब के नाम से ही बसा शहर है. इसीतरह लाहौर के निकट रावल्पीण्डी सिसोदिया वंशीय बाप्पा रावल के नाम से बसा है. जो चित्योद के राणा थे इन्होने सिंध के मुस्लिम सुल्तान को हराया था और दाहिरसिया को राजा बनाया था. यह आठवीं शदी की बकया है. भारत में इनका इतिहास नहि पढ़ाया जाता क्योंकि वोट खिसक सकते है. भरत के पुत्र को पुष्करावती और तक्षशिला तथा लक्ष्मण के पुत्र लखनऊ और शत्रुघ्न के पुत्र मथुरा के राजा बने.
    शल्य जो कौरवों कि तरफ से महाभारत लडे थे वे भी राम वंशी थे. श्री राम सूर्यवंशी थे. इनका कुल भगवान सुर्य से शुरू हुआ था. मनु समस्त मानव जाती के आदि पिता है. भगवान राम के ही कुल में अनेक प्रतापी राजा हुए है. इनकी राजधानी अयोध्या थी. रघुकुल इसलिए कहते है कि अपने दिए हुए वचन कि प्रतिष्ठि बचाते है. रघुकुल रीती प्रसिद्ध है. यह वंश इच्छवाकु वंश भी कहलाता है क्योंकि इच्छवाकु इस वंश के ही राजा थे. उनसे कुल चला. वह प्रतापी थे. पृथु, भगीरथ मान्धाता राजा सागर इस कुल के महान राजा थे जिनके समाजहित के कार्य अनुकरणीय है. गंगा को पृथ्वी पर लाने वाले भगीरथ अपने भगीरथ प्रयत्न के लिए प्रसिद्ध है. गंगा उनके प्रयोजन और प्रयास से ही देवलोक से अवतरित हो भूलोक पर आई और सगर के साथ हज़ार पुत्रो का जल समाधी होकर उद्धार किया कपिल. मुनि के आश्रम में फिर समुद्र में गंगासागर में मिल गयी. पाताल लोक गयी गंगा जि इसलिए तीनो लोक में बहती कहि जाती है.
भानुकुल नाथ श्री राम
    अब भी अनेको राजघराने स्वयं को राम का वंशज मनते है जैसे आमेर जयपुर राजघराना कछवाहे राजा, मेवाड़ का राणा घराना और मध्य प्रदेश में भी एक कोई राजघराना है जो स्वयं को राम के वंशज कहते है. राजपूतों में गुहील, गहलोत, बेशला, राघव भी रघुवंशी है. जाटों में भी कई कुल है गौत्र है जो राम से जुड़े है जैसे बाल्यान खाप. यह राजा बल से चली है जो रघुवंधी थे. कुछ खटीक भी स्वयं को रघुवंशी कहते है. कुछ इस्लाम को अपनाये हुए मेवात के मुसलमान भी स्वयं को राम का वंशज कहते है.
    महाराणा प्रताप भी श्री राम के वंश से है. हाथी प्रबेठे राजा मान सिंह जिन पर महाराणा अपने प्रसिद्ध भारी भाले से घोड़े चेतक पर सवार होकर वार कर रहे है और वह अपनी जान बचाने के लिए होदे में छिप जाता है. वह मानसिंह भी राम के वंशज है और मुग़ल सेना के सेनापति है. अतः दोनो तरफ राम वंशी ही लड़ रहे है.

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