आदिवासी दिवस के दिन ही कांग्रेस का मानगढ़ पर चुनावी शंखनाद करना सिर्फ एक राजनैतिक स्टंट
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आदिवासी दिवस के दिन ही कांग्रेस का मानगढ़ पर चुनावी शंखनाद करना सिर्फ एक राजनैतिक स्टंट

  बांसवाड़ा/राजस्थान।। बीटीपी ने कांग्रेस पर बड़ा जुबानी हमला करते हुए आदिवासी दिवस के दिन ही कांग्रेस सरकार के द्वारा मानगढ़ पर चुनावी शंखनाद करना कांग्रेस का राजनैतिक स्टंट बताया है। जी हां भारतीय ट्रायबल पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विजयभाई मईडा ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा जनजातीय वोटरों को लुभाने के लिए 09 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के दिन ही कांग्रेस सरकार के द्वारा बांसवाड़ा जिले के मानगढ़ पर चुनावी शंखनाद करना कहीं ना कहीं आदिवासीयों के अंतरराष्ट्रीय पर्व को राजनीतिकरण के रूप में रंग देने का काम किया जा रहा है।  
  मईड़ा ने कहा कि यह समाज को अपने मूल संस्कृति, रूढ़ी, परंपरा से अलग-थलग करना एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति भ्रमित करने का षड्यंत्र है। राजस्थान सरकार के चुनावी वादे जुमले बनकर रह गए है, पिछली बार चुनावी घोषणा पत्र में राजस्थान की आठ करोड़ जनता के सामने जो वादे किए चाहे वह किसानों की कर्ज माफी, बेरोजगारी भत्ता, संविदा कर्मियों को स्थाई करना हो वह बस एक बैरियर बन कर रह गए है। 
  मईड़ा ने अपने प्रेस नॉट में बताया कि बांसवाड़ा जिले में दो मंत्री, एक जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की हालत गंभीर है। शिक्षा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भौतिक सुविधाओं का अभाव, रोजगार के लिए जनजातीय लोगो का मजबूरीवश पलायन चरम सीमा पर है, जिनका आए दिन आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण शिकार हो रहां हैं। मईड़ा ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से मांग कर रहे है कि शेड्यूल एरिये के बाहर के कार्मिक 2500 की संख्या में गृह जिलों में जाना चाहते हैं, उन्हें नहीं भेजकर यहां के प्रशिक्षित बेरोजगारों के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। जनजाति क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए गोविंद गुरु विश्वविद्यालय बांसवाड़ा की स्थापना की गई लेकिन विश्वविद्यालय में एसटी वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं होना तथा भर्तियों में आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं करना बैगडोर से भर्तियों की जा रही है। शेड्यूल एरिये के अंतर्गत पिछले कई वर्षों से जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण, राज्य की प्रशासनिक सेवाओं में 6.5% आरक्षण, न्यूनतम अंको की बाध्यता हटाने की मांग पर अमल नहीं किया गया। 
    मईड़ा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में आदिवासियों, दलितों और पिछड़े तबके के लोगों पर आए दिन अन्याय अत्याचार को बढ़ावा मिला चाहे काकरी डूंगरी प्रकरण हो, कार्तिक भील हत्याकांड, जितेंद्र मेघवाल हत्याकांड, डॉक्टर अनिमेष भील हत्याकांड, इंद्र मेघवाल हत्याकांड, जोधपुर दुष्कर्म प्रकरण आदि में आज तक न्याय नहीं मिला है।   उन्होंने कहा कि कांग्रेस व भाजपा आदिवासियों के हितेषी हैं तो पांचवी-छठी अनुसूची, पेसा एक्ट, और भील प्रदेश की मांग का समर्थन करें तथा मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करें व स्टेट हाईवे से जोड़ा जावे क्योंकि यहां पर 4 राज्यों के लोगों का आवागमन होता है। ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें ठीक नहीं होने से दुर्घटना की संभावना भी बनी रहती है। बांसवाड़ा को पूर्ववर्ती भाजपा व कांग्रेस की सरकारों ने रेल से जोड़ने का झुनझुना आज तक पकड़ा रखा है।   मईड़ा ने बांसवाड़ा के टीएसपी संभाग बनने के बाद अब सभी न्यायिक अभिकरणों एवं टीएसपी संभाग की दृष्टि से यहाँ जनजातीय वर्ग को सुलभ न्याय उपलब्ध करवाने हेतु हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि आजादी से आज तक भाजपा व कांग्रेस ने बारी-बारी से आदिवासियों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया लेकिन यहां का युवा और आम जनता समझ चुकी है, जिसका आने वाले विधानसभा चुनाव में करारा जवाब मिलेगा।

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