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Arthuna कबूतर-बंदरों की मौत... सड़ा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण! अरथूना में जलदाय विभाग के खिलाफ भारी हंगामा

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बांसवाड़ा: अरथूना में दूषित पानी की सप्लाई पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, 50 साल पुरानी जर्जर टंकी बनी बीमारी का सबब

बांसवाड़ा/ राजस्थान।। बांसवाड़ा जिले के अरथूना कस्बे में जलदाय विभाग की बड़ी लापरवाही के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान ग्रामीणों ने विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए और जमकर हंगामा किया।


50 साल पुरानी टंकी, खुला ढक्कन और मर रहे जानवर

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के करीब 200 परिवारों को वर्ष 1973 में बनी एक बेहद जर्जर टंकी से पानी की सप्लाई की जा रही है। आधी सदी पुरानी हो चुकी इस टंकी की हालत इतनी खस्ता है कि इसका ढक्कन तक गायब है। खुले ढक्कन के कारण आए दिन इसमें कबूतर और बंदर गिरकर मर जाते हैं। इसी सड़े हुए और दूषित पानी को पीने के लिए ग्रामीण मजबूर हैं, जिससे इलाके में गंभीर बीमारियां और महामारी फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है।

सीधी पाइपलाइन से सप्लाई की मांग

शिविर में पहुंचे आक्रोशित ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई। लोगों ने मांग की कि इस जानलेवा साबित हो रही पुरानी जर्जर टंकी से तत्काल प्रभाव से सप्लाई बंद की जाए और ग्रामीणों को सीधे मुख्य पाइपलाइन से जोड़कर स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जाए।

जलदाय विभाग का आश्वासन: 4-5 दिन में बदलेगी व्यवस्था

ग्रामीणों के भारी हंगामे और विरोध को देखते हुए जलदाय विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में मोर्चा संभाला। विभाग ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि:

  • अगले 4 से 5 दिनों के भीतर जर्जर टंकी को बाईपास कर सीधे पाइपलाइन से जलापूर्ति (Direct Water Supply) शुरू कर दी जाएगी।

  • जल जीवन मिशन (JJM) के तहत क्षेत्र में जल्द ही एक नई पानी की टंकी और नई पाइपलाइन का निर्माण कराया जाएगा, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में सीधी सप्लाई शुरू नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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