MEA विदेश में पत्रकार ने पूछा— 'मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते?'

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"पीएम मोदी बिचौलियों के बजाय सीधे जनता से संवाद करना पसंद करते हैं" — विदेशी पत्रकार के सवाल पर भारतीय राजनयिक का जवाब

नई दिल्ली / वेलिंगटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सवाल उठे हैं। हाल ही में न्यूजीलैंड में भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक स्थानीय पत्रकार ने सीधे पूछ लिया कि प्रधानमंत्री ने अपनी इस यात्रा के दौरान कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की?

इस सवाल पर भारतीय राजनयिक और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रुद्रेंद्र टंडन ने पीएम मोदी की अनूठी राजनीतिक संचार शैली (Political Communication Style) का खुलकर बचाव किया।

"जनता को मध्यस्थ पसंद नहीं" — रुद्रेंद्र टंडन

राजनयिक रुद्रेंद्र टंडन ने हालांकि शुरुआत में कहा कि इस सवाल का जवाब देना सीधे तौर पर उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, लेकिन इसके बाद उन्होंने विस्तार से पीएम मोदी के इस रुख के पीछे का कारण समझाया। उन्होंने पीएम मोदी को एक "पारंपरिक और ठेठ भारतीय राजनेता" (quintessential Indian politician) बताते हुए कहा:

"आपको यह समझना होगा कि भारत के मतदाता मुख्य रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि के हैं और वे अपने नेता से सीधा संपर्क चाहते हैं। वे नहीं चाहते कि उनसे कोई बड़े रौब के साथ बात करे या फिर किसी मध्यस्थ (Intermediaries) के जरिए उन तक अपनी बात पहुंचाए।"

टंडन के मुताबिक, पीएम मोदी किसी मीडिया माध्यम या बिचौलिए के बजाय सीधे देश की जनता से संवाद करने को प्राथमिकता देते हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजरें और प्रतिक्रियाएं

इस यात्रा को कवर कर रहे एक ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार ने लाइव टीवी पर रिपोर्टिंग के दौरान इस मुद्दे को रेखांकित किया। पत्रकार ने टिप्पणी करते हुए कहा: "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे पर हमारी उनसे मुलाकात बस इतनी ही करीब से हो सकती थी। वे आमतौर पर बिना स्क्रिप्ट वाली खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचते हैं और पहले से तय व पूरी तरह व्यवस्थित कार्यक्रमों को ही प्राथमिकता देते हैं।"

यह पहली बार नहीं है जब विदेश में इस तरह के सवाल उठे हैं। इस साल की शुरुआत में पीएम मोदी के यूरोप दौरे (विशेषकर नॉर्वे और नीदरलैंड) के दौरान भी वहां के स्थानीय पत्रकारों ने सार्वजनिक रूप से पूछा था कि भारतीय प्रधानमंत्री अपने समकक्षों की तरह स्वतंत्र सवालों के जवाब क्यों नहीं देते।

इस पर सवाल उठाने वाली नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग को सोशल मीडिया पर भारी ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा था। हालांकि, उन्होंने बाद में कहा कि इस तरह के विवाद यह दर्शाते हैं कि पीएम मोदी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस न किए जाने के मुद्दे पर अब वैश्विक मीडिया का ध्यान तेजी से जा रहा है।

मुख्य आंकड़े और पृष्ठभूमि

  • प्रेस फ्रीडम इंडेक्स: 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' द्वारा जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) में भारत कुल 180 देशों में 157वें स्थान पर है।

  • 12 वर्षों का कार्यकाल: प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल से अधिक का कार्यकाल पूरा करने के बाद भी पीएम मोदी ने भारत में अब तक एक भी स्वतंत्र, बिना स्क्रिप्ट वाली खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है।

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