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धर्मांतरण के आरोपियों को हाईकोर्ट से झटका; प्रलोभन देकर सामूहिक धर्मांतरण कराने वालों की जमानत नामंजूर

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धर्मांतरण मामला: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

बांसवाड़ा/जोधपुर/राजस्थान बांसवाड़ा जिले के बहुचर्चित कुशलगढ़ धर्मांतरण प्रकरण में राजस्थान उच्च न्यायालय से आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। माननीय न्यायालय के न्यायाधीश सुनील बेनीवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी अनिल (पुत्र देवजी रावत), नितेश (पुत्र प्रेमचंद डामोर), दिलीप (पुत्र हलिया रावत), वरदेश (पुत्र बाबू डामोर), प्रवीण (पुत्र श्यामजी डामोर) और पंकज (पुत्र तेरसिंह डामोर, सभी निवासी कलिंजरा) द्वारा प्रस्तुत की गई जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

Religious conversion case in Kushalgarh Banswara


न्यायालय में प्रार्थी पक्ष की जोरदार पैरवी

प्रार्थी रवि भाबोर के अधिवक्ता पुष्पेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी पक्ष के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष सभी तथ्यों को बेहद पुरजोर तरीके से रखा। उन्होंने कानून की धारा 3, 5 एवं 7(2)(ख) पर न्यायालय का विशेष ध्यान आकर्षित कराया।

सामूहिक धर्मांतरण और हमले के गंभीर आरोप

अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि आरोपियों द्वारा किया गया कृत्य 'राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2025' के तहत एक अक्षम्य और कड़ा दंडनीय अपराध है। इस प्रकरण में SC/ST वर्ग के सीधे-साधे लोगों को प्रलोभन देकर सामूहिक धर्मांतरण करवाया जा रहा था। इस कानून के तहत आरोपियों को न्यूनतम 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और न्यूनतम 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

इसके अलावा, जब कुशलगढ़ के स्थानीय लोगों ने इस अवैध कृत्य का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह कृत्य अपराध की गंभीरता को और अधिक बढ़ा देता है।

सजा के कड़े प्रावधान देख पीछे हटे आरोपी के वकील

मामले की गंभीरता और कानून में कड़ी सजा के प्रावधानों को भांपते हुए, आरोपियों के अधिवक्ता ने न्यायालय से अपनी जमानत याचिका वापस लेने का निवेदन किया। इसके बाद माननीय न्यायालय ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।

मुख्य बिंदु जो इस खबर को खास बनाते हैं:

  • कड़ा कानून: राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2025 के तहत कार्रवाई।

  • बड़ी सजा का डर: 20 साल आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान होने से बैकफुट पर आए आरोपी।

  • स्थानीय लोगों पर हमला: विरोध करने पर ग्रामीणों पर किया गया था जानलेवा हमला।

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