ना अदालत का खौफ, ना कानून का डर: दबंगों ने गरीब आदिवासी की जमीन पर किया अवैध कब्जा, खूनी संघर्ष में बदले हालात
● उपखंड न्यायालय और पुलिस के आदेश भी बेअसर, बेखौफ दबंग कर रहे पक्के मकान का निर्माण
बांसवाड़ा/सज्जनगढ़/राजस्थान।। एक तरफ राजस्थान सरकार गरीबों के कल्याण, हक और सुरक्षा के लिए नित नई योजनाएं लागू कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें ना तो कानून का डर है और ना ही अदालत का खौफ। 'गरीब की जोरू, सबकी भाभी' वाली कहावत आज बांसवाड़ा जिले के एक गरीब आदिवासी परिवार पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है। प्रशासन के दावों और शिविरों की सफलता की कहानियों के बीच, न्याय के लिए दर-दर भटकते पीड़ितों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
मामला बांसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ उपखंड क्षेत्र के सातसेरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले बोचडदा गांव (थाना कसारवाड़ी) का है। पीड़ित सगे भाइयों—कलसिंह व वालसिंह (पुत्र हुरतान, जाति पणदा) ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनकी पैतृक खेती की जमीन (खसरा नंबर 356, क्षेत्रफल 0.2104) है। इस जमीन पर वे वर्षों से खरीफ और रबी की फसलें बोकर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। इस जमीन पर उन्होंने आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक से लोन भी लिया था, जिसे वे चुका भी चुके हैं।
अदालती आदेश को ठेंगा दिखा रहे दबंग
पीड़ित भाइयों का आरोप है कि गांव के ही दबंग भीमा (पुत्र मंडियां), उसके पुत्र प्रेम, अकल, दिलीप तथा नाहटा (पुत्र जोगड़ा) व जोगड़ा (पुत्र हडिया) ने उनकी इस मौरूसी जमीन पर जबरन और तथाकथित रूप से अतिक्रमण कर लिया है। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने उस जमीन पर अवैध रूप से पक्के मकान का निर्माण कार्य शुरू कर दिया।
पीड़ितों ने इसके खिलाफ उपखंड न्यायालय सज्जनगढ़ में वाद दायर किया था, जिसके बाद कोर्ट ने कसारवाड़ी पुलिस थाने को पाबंदी (स्टे) के आदेश दिए थे। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपियों के खिलाफ दो बार कानूनी कार्रवाई कर उन्हें न्यायालय में पेश भी किया, लेकिन इसके बावजूद दबंगों के सिर से कानून का डर गायब है। वे अदालती आदेश को ठेंगा दिखाकर लगातार पक्के मकान का निर्माण कर रहे हैं। पीड़ितों द्वारा बार-बार लिखित शिकायत देने के बाद भी निर्माण कार्य नहीं रोका गया।
आखिरकार हुआ वही जिसका डर था: न्याय में देरी से बहा खून
"यदि समय रहते प्रशासन जाग जाता और पीड़ितों को न्याय मिल जाता, तो आज यह खूनी खेल न होता।"
प्रशासन की ढिलाई का खामियाजा आखिरकार पीड़ितों को भुगतना पड़ा। इसी जमीनी विवाद ने आज बेहद हिंसक रूप ले लिया। अवैध निर्माण को रोकने और अपनी ही जमीन को बचाने के प्रयास में दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हो गई।
इस खूनी संघर्ष में महिलाओं सहित 5 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तुरंत डुंगरा छोटा चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, घायलों में से कुछ के सिर में गंभीर चोटें आई हैं (टांके लगे हैं) और एक व्यक्ति का हाथ फ्रैक्चर होने की भी खबर है। घटना की सूचना मिलते ही कसारवाड़ी थाने से पुलिस बल मौके पर पहुंच गया है और स्थिति को नियंत्रण में लिया है।
मुख्यमंत्री से लेकर जिला कलेक्टर तक न्याय की गुहार
लगातार मिल रही धमकियों और प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर अब पीड़ित दोनों भाइयों ने सीधे मुख्यमंत्री (राजस्थान सरकार), पुलिस कमिश्नर जयपुर, जिला कलेक्टर बांसवाड़ा और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) बांसवाड़ा को लिखित शिकायत भेजकर न्याय की भीख मांगी है।
अब देखना यह होगा कि क्या इस खूनी संघर्ष और गंभीर घायलों के अस्पताल पहुंचने के बाद प्रशासन की नींद टूटेगी? क्या इन गरीब आदिवासी भाइयों को दबंगों के चंगुल से अपनी जमीन वापस मिलेगी, या फिर रसूखदारों के आगे कानून यूं ही बौना बना रहेगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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