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Math Mangleshwar Dham गुरु गोरखनाथ और पांडवों की तपोभूमि: तीन राज्यों की आस्था का केंद्र है 'मठ मंगलेश्वर महादेव'

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13वीं शताब्दी का प्राचीन धाम: जहाँ हिरन नदी के तट पर विराजते हैं 'स्वयंभू' मठ मंगलेश्वर महादेव

बांसवाड़ा (राजस्थान)। 'कंकर-कंकर में शंकर' की मान्यता वाले हमारे भारत देश में कई ऐसे प्राचीन एवं ऐतिहासिक धार्मिक स्थल हैं, जो युगों-युगों से जन-आस्था के केंद्र बने हुए हैं। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सज्जनगढ़ उपखंड अंतर्गत, तांबेसरा के समीप स्थित मगरदा गांव का 'मठ मंगलेश्वर महादेव मंदिर' एक ऐसा ही पावन धाम है, जहाँ आस्था, भक्ति और श्रद्धा का अलौकिक संगम देखने को मिलता है।

Math Mangleshwar Banswara

पौराणिक इतिहास व किंवदंती: पांडवों और नाथ परंपरा का पावन धाम

किंवदंतियों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह पवित्र मंदिर 13वीं शताब्दी का बताया जाता है। मान्यता है कि यह स्थान नाथ संप्रदाय के महान सिद्ध गुरु गोरखनाथ, गुरु मत्स्येंद्रनाथ (मुछंदर नाथ) तथा महाभारत काल में पांडवों के अज्ञातवास का साक्षी और प्रमुख साधना केंद्र रहा है।

यहाँ के गादीपति महंत दिवाकर भारती के अनुसार, इस स्वयंभू पावन धाम की महिमा इतनी अपार है कि यहाँ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों—मध्यप्रदेश और गुजरात से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु मन की शांति और महादेव की कृपा पाने पहुँचते हैं। मंदिर परिसर में भगवान शंकर के साथ-साथ रामभक्त श्री हनुमान जी का सुंदर मंदिर भी भक्तों को आत्मिक सुकून प्रदान करता है।

हिरन नदी का तट और पुरातात्विक महत्त्व

राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ (भारत) के केंद्रीय प्रमुख संत नरसिंह गिरि महाराज बताते हैं कि इस ऐतिहासिक स्थल के आसपास की भूमि में खुदाई के दौरान प्राचीन ईंटें निकलती हैं, जो इसके अति-प्राचीन स्वरूप को प्रमाणित करती हैं।

मंदिर के निकट ही कल-कल छल-छल करती हिरन नदी प्रवाहित होती है। इस क्षेत्र में दिवंगत आत्माओं की आत्मशांति और मोक्ष के लिए मृतकों की अस्थियाँ इसी हिरन नदी के पवित्र जल में विसर्जित की जाती हैं।

जूना अखाड़ा और गुरु-शिष्य परंपरा (1956 से)

मंदिर में गुरु-शिष्य परंपरा की विधिवत शुरुआत वर्ष 1956 में हुई। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा (बड़ा हनुमान घाट, वाराणसी) द्वारा इस पावन स्थल को 'मठ मंगलेश्वर' नाम दिया गया।

समय-समय पर पूज्य संतों एवं महंतों ने यहाँ अनवरत जप-तप, यज्ञ, अनुष्ठान और व्रत रखकर इस भूमि को सिद्ध किया है:

  • महंत 1008 श्री महंत प्रताप भारती जी

  • श्री शिवमंगल भारती जी

  • महंत श्री सोना भारती जी

  • श्री शिप्रा भारती महाराज

  • श्रद्धेय गुरु महाराज संत श्री सुदर्शन भारती जी

आज भी श्रद्धालु यहाँ अटूट निष्ठा के साथ भोलेनाथ के दर्शन कर अपने मनोरथ सिद्ध करते हैं।

देवस्थान विभाग के संरक्षण में भरते हैं वार्षिक मेले

मठ मंगलेश्वर मंदिर के ओम भारती एवं शंकर भारती ने जानकारी दी कि यह प्रमुख धार्मिक स्थल वर्तमान में देवस्थान विभाग की देखरेख में संचालित है।

यहाँ प्रतिवर्ष प्रमुख अवसरों पर भव्य मेलों का आयोजन होता है:

  1. कार्तिक पूर्णिमा मेला

  2. आमली ग्यारस मेला

  3. नवरात्रि महोत्सव

इन अवसरों पर राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा मंगलेश्वर महादेव के दर्शन कर मन्नतें मांगते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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