13वीं शताब्दी का प्राचीन धाम: जहाँ हिरन नदी के तट पर विराजते हैं 'स्वयंभू' मठ मंगलेश्वर महादेव
बांसवाड़ा (राजस्थान)। 'कंकर-कंकर में शंकर' की मान्यता वाले हमारे भारत देश में कई ऐसे प्राचीन एवं ऐतिहासिक धार्मिक स्थल हैं, जो युगों-युगों से जन-आस्था के केंद्र बने हुए हैं। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सज्जनगढ़ उपखंड अंतर्गत, तांबेसरा के समीप स्थित मगरदा गांव का 'मठ मंगलेश्वर महादेव मंदिर' एक ऐसा ही पावन धाम है, जहाँ आस्था, भक्ति और श्रद्धा का अलौकिक संगम देखने को मिलता है।
किंवदंतियों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह पवित्र मंदिर 13वीं शताब्दी का बताया जाता है। मान्यता है कि यह स्थान नाथ संप्रदाय के महान सिद्ध गुरु गोरखनाथ, गुरु मत्स्येंद्रनाथ (मुछंदर नाथ) तथा महाभारत काल में पांडवों के अज्ञातवास का साक्षी और प्रमुख साधना केंद्र रहा है।
हिरन नदी का तट और पुरातात्विक महत्त्व
राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ (भारत) के केंद्रीय प्रमुख संत नरसिंह गिरि महाराज बताते हैं कि इस ऐतिहासिक स्थल के आसपास की भूमि में खुदाई के दौरान प्राचीन ईंटें निकलती हैं, जो इसके अति-प्राचीन स्वरूप को प्रमाणित करती हैं।
जूना अखाड़ा और गुरु-शिष्य परंपरा (1956 से)
मंदिर में गुरु-शिष्य परंपरा की विधिवत शुरुआत वर्ष 1956 में हुई। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा (बड़ा हनुमान घाट, वाराणसी) द्वारा इस पावन स्थल को 'मठ मंगलेश्वर' नाम दिया गया।
महंत 1008 श्री महंत प्रताप भारती जी
श्री शिवमंगल भारती जी
महंत श्री सोना भारती जी
श्री शिप्रा भारती महाराज
श्रद्धेय गुरु महाराज संत श्री सुदर्शन भारती जी
आज भी श्रद्धालु यहाँ अटूट निष्ठा के साथ भोलेनाथ के दर्शन कर अपने मनोरथ सिद्ध करते हैं।
देवस्थान विभाग के संरक्षण में भरते हैं वार्षिक मेले
मठ मंगलेश्वर मंदिर के ओम भारती एवं शंकर भारती ने जानकारी दी कि यह प्रमुख धार्मिक स्थल वर्तमान में देवस्थान विभाग की देखरेख में संचालित है।
कार्तिक पूर्णिमा मेला
आमली ग्यारस मेला
नवरात्रि महोत्सव
इन अवसरों पर राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा मंगलेश्वर महादेव के दर्शन कर मन्नतें मांगते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।



