अयोध्या में आस्था पर डाका? पूर्व गृह सचिव ने चंपत राय पर लगाए गंभीर आरोप, SIT तक पहुंची शिकायत
मां के गहनों से बनी 'सोने की रामचरितमानस' राम मंदिर से गायब, पूर्व गृह सचिव बोले- 'चंपत राय ने दुत्कारा'
अयोध्या राम मंदिर से सोने की रामचरितमानस 'गायब'? पूर्व गृह सचिव के आरोपों से मचा हड़कंप
अयोध्या/उत्तर प्रदेश।। राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद जहां एक ओर देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। देश के पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायणन ने आरोप लगाया है कि उनके द्वारा राम मंदिर में दान की गई सोने की अनमोल रामचरितमानस वहां से गायब हो चुकी है। इस घटना के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
मां की आखिरी निशानी और आस्था का था संगम
मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायणन अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। उनकी माता ने करीब 15 वर्षों तक वैधव्य (विधवा) जीवन जिया और अपने जीवनभर के गहने अपनी बहू (लक्ष्मी नारायणन की पत्नी) को सौंप दिए थे। माता के देहांत के बाद, भावुक होकर पूर्व गृह सचिव ने फैसला किया कि वे इन गहनों को अपने पास रखने के बजाय भगवान श्री राम के चरणों में न्योछावर कर देंगे।
उन्होंने अपनी मां के गहने और अपनी जमापूंजी से अतिरिक्त पैसे मिलाकर बेहद श्रद्धा के साथ एक सोने की रामचरितमानस तैयार करवाई और उसे राम मंदिर को दान कर दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी मूल्यवान वस्तु दान करने के बाद भी उन्हें ट्रस्ट की तरफ से कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई।
"जो मैं कहूंगा, वही होगा..." – चंपत राय पर बदसलूकी का आरोप
एस. लक्ष्मी नारायणन का दावा है कि दान देने के कुछ समय बाद उन्हें सूचना मिली कि उनकी दी हुई सोने की रामचरितमानस अपने स्थान पर नहीं है और गायब हो चुकी है।
घंटों इंतजार और मुलाकात: इस बात का पता लगाने के लिए वे कई बार अयोध्या गए। घंटों इंतजार करने के बाद जब उनकी मुलाकात श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से हुई, तो उनका रवैया बेहद निराशाजनक था।
ट्रस्ट का जवाब: आरोपों के मुताबिक, जब पूर्व गृह सचिव ने चंपत राय से शिकायत की, तो उन्होंने तीखे लहजे में कहा, "क्या मैं यही सब करता रहूं?"
अधिकार का दावा: जब लक्ष्मी नारायणन ने याद दिलाया कि इसे संभालकर रखने का वादा किया गया था, तो चंपत राय ने कथित तौर पर कहा, "जो मैं कहूंगा, वही होगा। जाओ, जो करना है करो।"
SIT तक पहुंची शिकायत, उठ रहे बड़े सवाल
पूर्व गृह सचिव ने इस मामले को लेकर शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों से गुहार लगाई और कई पत्र लिखे, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी उस सोने की रामचरितमानस का कोई सुराग नहीं मिल सका है। आखिरकार, थक-हारकर उन्होंने अयोध्या में चल रहे अन्य मामलों की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को भी एक शिकायती पत्र लिखकर इस पूरे 'लूट कांड' की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
बड़ा सवाल: देश के इतने बड़े पूर्व प्रशासनिक अधिकारी (IAS) और पूर्व गृह सचिव के साथ अगर ऐसा व्यवहार हो सकता है और उनकी आस्था की धरोहर गायब हो सकती है, तो आम भक्तों के चढ़ावे और दान की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की मंशा और पारदर्शिता पर अब गंभीर उंगलियां उठ रही हैं।

