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"यहाँ मिलता है ₹11 में पाप मुक्ति का सर्टिफिकेट! गजनवी भी टेक चुका है इस दर पर मत्था"

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कांठल का हरिद्वार: जहाँ मात्र 11 रुपए में मिलता है 'पाप मुक्ति' का अनोखा प्रमाण-पत्र

प्रतापगढ़। आस्था, इतिहास और चमत्कारों की धरती राजस्थान में एक ऐसा अनोखा शिव मंदिर है, जहाँ आज के आधुनिक दौर में भी मात्र 11 रुपए में 'पाप मुक्ति' का लिखित प्रमाण-पत्र दिया जाता है। हम बात कर रहे हैं प्रतापगढ़ जिले के अरनोद उपखंड के पास, अरावली की सुंदर वादियों में स्थित गौतमेश्वर महादेव मंदिर की। इसे "आदिवासियों का हरिद्वार" और "कांठल का हरिद्वार" भी कहा जाता है।

दक्षिणी राजस्थान के कांठल, वागड़ और मालवा क्षेत्र के भील-मीणा आदिवासी समुदायों के लिए यह स्थान सबसे पवित्र तीर्थ है। यहाँ लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करने और पवित्र स्नान के लिए आते हैं।

Pratapgarh Gautmeshwar


क्या है 11 रुपए के प्रमाण-पत्र का रहस्य?

इस मंदिर की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता है यहाँ का 'पापमोचनी गंगाकुंड'

  • मान्यता: यदि किसी व्यक्ति से अनजाने में कोई जीव-हत्या (जैसे गोहत्या या अन्य जीव की मृत्यु) हो जाती है या समाज उसे बहिष्कृत कर देता है, तो वह यहाँ आकर इस कुंड में स्नान करता है।

  • प्रमाण-पत्र: स्नान के बाद मंदिर के पुजारियों द्वारा 'अमिनात कचहरी गौतमेश्वर' की ओर से मात्र 11 रुपए की रसीद काटकर बाकायदा "पाप मुक्ति प्रमाण-पत्र" जारी किया जाता है, जिसे समाज में पूरी मान्यता मिलती है।

इतिहास और गजनवी से जुड़ी पौराणिक कथा

इस पौराणिक मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है, जहाँ शुंग काल, गुप्त काल और प्रतिहार-परमार वंश के प्राचीन अवशेष आज भी देखने को मिलते हैं।

महमूद गजनवी और मधुमक्खियों का हमला:

लोककथाओं के अनुसार, जब क्रूर आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने इस मंदिर के शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास किया, तो पहले प्रहार पर शिवलिंग से दूध और दूसरे प्रहार पर दही निकला। जैसे ही उसने तीसरा प्रहार किया, शिवलिंग से भयंकर मधुमक्खियों का झुंड निकला जिसने गजनवी की सेना पर हमला कर दिया। हार मानकर गजनवी ने यहाँ शीश नवाया और मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया, जिसका शिलालेख आज भी मंदिर में मौजूद है। यहाँ आज भी वह ऐतिहासिक शिवलिंग तीन भागों में खंडित होने के बावजूद पूरी आस्था के साथ पूजा जाता है।

मंदिर से जुड़ी 3 खास मान्यताएँ

विशेषतामहत्व और मान्यता
1. पाप मुक्ति प्रमाण-पत्रगंगाकुंड में स्नान के बाद मात्र ₹11 में मिलता है शुद्धि का लिखित प्रमाण।
2. संतान प्राप्ति की चाहमंदिर के पास स्थित मंदाकिनी कुंड को लेकर मान्यता है कि निसंतान दंपति यदि एक ही वस्त्र में यहाँ डुबकी लगाएं, तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है।
3. ऐतिहासिक मेलाहर साल मई के महीने में यहाँ 8 दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें देश-दुनिया और विशेषकर आदिवासी समाज के लाखों श्रद्धालु जुटते हैं।

प्रकृति की गोद में बसा है यह धाम

धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी मशहूर है। मंदिर के ठीक ऊपर से बहते झरने और बारिश के मौसम में अरावली की पहाड़ियों पर छाई मखमली हरियाली यहाँ आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेती है। पास ही में पवित्र जाखम नदी भी बहती है।

(नोट: अक्सर लोग कर्नाटक के जैन तीर्थ 'गोम्मटेश्वर' (श्रवणबेलगोला) और राजस्थान के इस शिव तीर्थ 'गौतमेश्वर' में भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन प्रतापगढ़ का यह धाम पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित है, जो प्रतापगढ़ मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर अरनोद के पास स्थित है।)

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