Transfer तबादले के 6 दिन बाद भी कुर्सियों से चिपके अधिकारी; सरकारी आदेशों को ठेंगा, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

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सरकारी आदेशों को ठेंगा: तबादले के 6 दिन बाद भी कुर्सियों से चिपके अधिकारी, प्रशासनिक हलके में चर्चा गर्म

बांसवाड़ा। राजस्थान में पंचायती राज विभाग द्वारा जारी की गई तबादला सूची को छह दिन बीत जाने के बाद भी जिले में धरातल पर उसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। राज्य सरकार के सख्त और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बांसवाड़ा जिले में कई रसूखदार अधिकारी अपने पुराने पदों को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। आदेशों पर अमल में हो रही इस देरी ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि सरकारी तंत्र की साख पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।


इन अधिकारियों की 'कुर्सी मोह' बनी चर्चा का विषय

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तबादला सूची में शामिल कई बड़े नाम छह दिन बाद भी अपने वर्तमान कार्यभार को संभाले हुए हैं:

  • मनोज दोषी (विकास अधिकारी): इनका स्थानांतरण प्रतापगढ़ जिले में किया गया है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में पैरवी के चलते इन्हें अब तक कार्यमुक्त (रिलीव) नहीं किया गया है।

  • खातू राम (असिस्टेंट इंजीनियर - AEN): इनका तबादला कोटा संभाग में किया जा चुका है। बावजूद इसके, इन्होंने नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने की जहमत नहीं उठाई है।

  • नागेंद्र सिंह (सहायक लेखा अधिकारी ग्रेड-द्वितीय): इनका स्थानांतरण विधि न्यायालय में किया गया था, लेकिन करीब एक हफ्ता बीतने को है और ये भी पुराने पद पर ही जमे हुए हैं।

आखिर किसके शह पर हो रही है सरकारी आदेशों की अवहेलना?

नियमों के मुताबिक, तबादला सूची जारी होने के तत्काल बाद अधिकारियों को रिलीव होकर नई जगह जॉइन करना होता है। लेकिन बांसवाड़ा में छह दिनों की यह देरी यह साफ बयां करती है कि या तो अधिकारियों को उच्च स्तर से शह मिली हुई है, या फिर वे बैकडोर से अपने तबादले रुकवाने की जुगत में लगे हैं।

अधिकारियों के इस अड़ियल रुख के कारण संबंधित विभागों में प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि ब्यूरोक्रेसी पर सरकार का नियंत्रण ढीला पड़ रहा है।

अब जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग पर टिकी नजरें

इस पूरे मामले के बाद अब आम जनता और राजनीतिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि आखिर सरकारी आदेशों की पालना कब सुनिश्चित होगी? क्या जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग के आला अधिकारी इन रसूखदारों पर सख्त कार्रवाई करते हुए इन्हें तुरंत कार्यमुक्त करवाएंगे, या फिर नियमों को इसी तरह ताक पर रखा जाता रहेगा? अब देखना दिलचस्प होगा कि मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन क्या कड़ा कदम उठाता है।

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