समान ड्यूटी, फिर भी FMG इंटर्न्स को स्टाइपेंड नहीं! जिला अस्पताल में प्रदर्शन कर सौंपी ज्ञापन
बांसवाड़ा। जिले के अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) इंटर्न्स का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। समान काम के बावजूद स्टाइपेंड न मिलने से नाराज FMG डॉक्टरों ने आज जिला अस्पताल परिसर में उग्र प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
डॉक्टरों का स्पष्ट आरोप है कि वे भारतीय MBBS इंटर्न्स के कंधों से कंधा मिलाकर OPD, इमरजेंसी और नाइट ड्यूटी में सेवाएं दे रहे हैं। कई बार उनसे लगातार 24 घंटे की कठिन ड्यूटी ली जा रही है, लेकिन मेहनताने के नाम पर उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।
राजस्थान में 2000 FMGs बिना स्टाइपेंड काम करने को मजबूर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि अन्य राज्यों में भारतीय MBBS इंटर्न्स को लगभग ₹21,700 प्रति माह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि राजस्थान में करीब 2000 FMG इंटर्न्स 'शून्य स्टाइपेंड' पर काम करने को मजबूर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की स्पष्ट गाइडलाइंस और सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद भी उनकी इस जायज मांग को अब तक तवज्जो नहीं दी गई है।
फाइलों का जाल और अधिकारियों का आश्वासन इंटर्न्स ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि जब भी वे अपनी बात रखते हैं, उन्हें केवल आश्वासन का झुनझुना थमा दिया जाता है। स्टाइपेंड से जुड़ी फाइलें मेडिकल कॉलेज, राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC), चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DME) और वित्त विभाग के बीच चक्कर काट रही हैं, लेकिन समाधान के नाम पर कुछ नहीं हुआ।
PMO को सौंपा ज्ञापन, दी राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी अपनी मांगों को लेकर FMGs ने आज जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (PMO) को मुख्यमंत्री व सरकार के नाम एक लिखित ज्ञापन सौंपा। इंटर्न्स ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने 'समान काम, समान वेतन' के सिद्धांत के तहत जल्द ही ₹21,700 प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग पूरी नहीं की, तो वे पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले किसी भी विपरीत प्रभाव की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

