‘रोड डॉक्टर’ का जज़्बा: हैदराबाद के बुजुर्ग दंपति ने खुद की पेंशन से भरे 2,000 से अधिक गड्ढे, बने मिसाल
हैदराबाद : सड़कों पर बने जानलेवा गड्ढों और प्रशासनिक सुस्ती पर जहां आम तौर पर लोग सिर्फ शिकायतें करते हैं, वहीं हैदराबाद के एक बुजुर्ग दंपति ने खुद आगे आकर समाज के सामने एक अनोखी मिशाल पेश की है। भारतीय रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी गंगाधर तिलक कटनम और उनकी पत्नी वेंकटेश्वरी कटनम बीते कई वर्षों से अपनी गाढ़ी कमाई से शहर की सड़कों के खतरनाक गड्ढों को भरने का काम कर रहे हैं।
हादसों से द्रवित होकर लिया बड़ा फैसला
गंगाधर तिलक के इस निस्वार्थ सफर की शुरुआत सड़कों पर गड्ढों के कारण होने वाले दर्दनाक हादसों को देखने के बाद हुई। शुरुआती दौर में उन्होंने पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों से शिकायतें कीं, लेकिन जब समस्या का त्वरित समाधान नहीं हुआ, तो उन्होंने खुद फावड़ा उठाने का फैसला किया। इस जनसेवा के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि उन्होंने बाद में अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी भी छोड़ दी ताकि वे पूरा समय सड़कों को सुरक्षित बनाने में दे सकें।
'पॉटहोल एम्बुलेंस' और लाखों का खर्च
यह दंपति अपनी गाड़ी से शहर भर में घूमता है, जिसे वे प्यार से 'पॉटहोल एम्बुलेंस' कहते हैं। कार में हमेशा गिट्टी, डामर और सड़क मरम्मत की सामग्री मौजूद रहती है।
2,030 से ज्यादा गड्ढे भरा: 11 सालों के भीतर यह दंपति 2,000 से अधिक जानलेवा गड्ढों की मरम्मत कर चुका है।
40 लाख रुपये की लागत: इस अभियान में गंगाधर तिलक ने अपनी पेंशन से लगभग 40 लाख रुपये की अपनी निजी जमा पूंजी खर्च कर दी।
‘रोड डॉक्टर’ और श्रमदान संगठन
लोगों के जीवन की रक्षा के लिए किए जा रहे इस भगीरथ प्रयास के कारण गंगाधर जी को हैदराबाद में ‘रोड डॉक्टर’ के नाम से पहचान मिली है। उन्होंने ‘श्रमदान’ नाम से एक संगठन भी शुरू किया है, जिसके जरिए युवा और अन्य स्वयंसेवक इस पहल से जुड़ते हैं। उनके लगातार प्रयासों को देखते हुए आगे चलकर सरकारी अधिकारियों ने भी उन्हें मरम्मत सामग्री उपलब्ध कराकर सहयोग देना शुरू किया।
‘दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद कदम उठाएं’
गंगाधर और वेंकटेश्वरी कटनम का संदेश बहुत सीधा और स्पष्ट है—यदि नागरिक केवल व्यवस्था को कोसने के बजाय अपने आसपास की समस्याओं को सुधारने की छोटी जिम्मेदारी खुद ले लें, तो समाज बहुत सुरक्षित और बेहतर बन सकता है।

