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विभिन्न रोगों में सहायक है सरसों का तेल



1. आधासीसी (माइग्रेन) : सिर के जिस तरफ दर्द होता है नाक के उस नथुने में 8 बूंद सरसों का तेल डालकर या सूंघने से आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है। ऐसा लगातार 5 दिनों तक करना चाहिए।
2. नासूर : आक (मदार) के दूध में रूई की बत्ती भिगोकर सुखा लें। इसे सरसों के तेल में डुबोकर मिट्टी के बर्तन में जलाकर काजल बनाकर नासूर पर लगाने से लाभ होता है।
3. दर्द व सूजन : 50 मिलीलीटर सरसों के तेल में 5 ग्राम कपूर मिलाकर मालिश करने से दर्द में फायदा होता है।
4. सर्दियों में अंगुलियों में सूजन : सेंधानमक में सरसों का तेल मिलाकर गर्म करें। रात को इस तेल को अंगुलियों पर लगाकर मौजे पहनकर सोने से सूजन मिट जाती है।
5. हृदय रोग : सरसों के तेल में खाना पकाने से तेल में उपस्थित एसिड `कोलेस्ट्रोल´ में परिवर्तन हो जाता है, जिससे हृदय रोग (दिल के रोग) होते हैं।
6. गैस : गैस बनने के रोग में रोगी की नाभि पर सरसों के तेल से चारों ओर दाईं और बाईं ओर मालिश करने से लाभ होता है।
7. नाभि के रोग : नाभि के अपनी जगह से हटने से अक्सर रोगी के पेट में दर्द, गैस, दस्त, भूख न लगना आदि रोग प्रकट होते हैं। इसको दूर करने के लिए नाभि को ठीक तरह से अपनी जगह पर बैठाना चाहिए। नाभि पर कोई भी तेल खासकर सरसों का तेल लगाने से लाभ होता है। रोग की तेजी होने पर रूई का फोया तेल में भरकर नाभि पर रख सकते हैं और इसे पट्टी से बांध सकते हैं। इनके अलावा श्वास-कास (दमा,खांसी), सिर-दर्द, वातरोग, उन्माद (पागलपन), अपस्मार (मिर्गी), कमर का दर्द आदि में भी नाभि पर तेल लगाने से लाभ होता है। यह 1 सप्ताह तक लगा सकते हैं। नाभि पर तेल लगाने के बाद शीतल (ठंडा) पेय नहीं पीना चाहिए और आराम करना चाहिए।
8. दांत दर्द : सरसों का तेल, नींबू का रस और सेंधानमक मिलाकर मंजन करने से दांत साफ होते हैं, दांतों का दर्द दूर होता है और दांत हिलने बंद हो जाते हैं। सरसों के तेल में नमक को बारीक पीसकर और छानकर मिलाकर मंजन करने से भी दांत दर्द और मसूढ़े फूलना ठीक हो जाते हैं। 1-2 बार सरसों का तेल एक नथुने से सूंघने पर दांत का दर्द कुछ समय के लिए बंद हो जाता है। इसे सूंघने से नाक, आंख, कान और सिर को ताकत मिलती है।
9. मालिश : सर्दी के मौसम में त्वचा का सूखापन मिटाने एवं साफ बनाये रखने के लिए शरीर की मालिश करनी चाहिए। इससे त्वचा सुन्दर दिखती है। मालिश के लिए सरसों का तेल उपयोग में लाना चाहिए। रात को सोते समय शरीर पर सरसों के तेल की मालिश करने से मच्छर नहीं काटते हैं। कसरत से थकान होने पर पैरों पर सरसों के तेल की मालिश करने से लाभ होता है।
10. पैरों की मालिश : पैरों के तलवों में तेल की मालिश करने से स्थिरता रहती है, आंखों की रोशनी बढ़ती है, नींद अच्छी आती है, पैरों का फटना बंद हो जाता है, थकावट, संकोच मिटता है और पैरों में किसी तरह का रोग नहीं होता है।
11. पैर फटना : सर्दियों में पैर फट जाए तो सोते समय उन पर सरसों का तेल लगाकर और पिसी हुई हल्दी ऊपर से पैरों मे लगाकर सो जायें । कुछ दिन तक ऐसा करने से फटे हुए पैर ठीक हो जाते हैं।
12. जम जूं : 25 मिलीलीटर नींबू का रस और 20 मिलीलीटर सरसों के तेल को मिलाकर लगाने से जम जूं नष्ट हो जाती है।
13. स्तनों का उभार : स्त्री के स्तनों पर रोजाना सरसों के तेल की मालिश करने से स्तनों में मोटापन और उभार आता है।
14. खांसी : सरसों के तेल मे सेंधानमक मिलाकर छाती पर मलने से कफ आसानी से निकल जाता है और खांसी कम हो जाती है।
15. दमा (श्वास रोग) :
   यदि अधिक खांसने पर भी कफ न निकलता हो तो सरसों के 20 मिलीलीटर तेल में 5 ग्राम सेंधानमक अच्छी तरह से मिलाकर तो रोगी के वक्षस्थल (सीने) पर मालिश करने से कफ (बलगम) का रोग ठीक हो जाता है।
   10 ग्राम पुराने गुड़ और सरसों के तेल को मिलाकर रोजाना 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से 3 सप्ताह में ही सभी प्रकार के श्वास (दमा) रोग जड़ सहित मिट जाते हैं।
   दमा रोग का दौरा पड़ने पर सरसों के तेल में सेंधानमक मिलाकर छाती पर धीरे-धीरे मलना चाहिए। इससे रोगी को शांति मिलती है। जयभारत।