आधे लीटर गोमूत्र से 28 घंटे सीफलएल बल्ब जलाया जा सकता है

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     सिर्फ आधे लीटर गोमूत्र से आप 28 घंटे न केवल एक सीफलएलबल्ब जला सकते हैं, बल्कि मोबाइल भी चार्ज कर सकते हैं। भौतीगोशाला, कानपुर ने गोज्योति नाम से ऐसा लैंप विकसित किया हैजिसमें आधा लीटर गोमूत्र से एक सप्ताह तक झोपड़ी रोशन की जासकती है। खास बात यह है कि इस संयंत्र के उपयोग में अन्य किसीप्रकार का कोई खर्च नहीं होता।भौती गोशाला में एक ऐसी बैट्रीतैयार की गई है जो सिर्फ गोमूत्र से चार्ज होती है। छह वोल्ट कीइस बैट्री में आधा लीटर गोमूत्र डाल देते हैं, इसके बाद सीफल काबैट्री से कनेक्शन कर देते हैं।
    सुविधानुसार स्विच भी लगा देते हैं। स्विच ऑन करते ही सीफल बल्ब जल उठती है। इस बैट्री से एक अन्य लिंक निकालकर मोबाइल चार्जर भी लगा दिया जाता है। गोशाला सोसाइटी के उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद प्रेम मनोहर के अनुसार, एक गोज्योति बनाने की लागत करीब डेढ़ हजार रूपये आती है। बल्क में बनाने पर यह लागत और भी घट सकती है। आधे लीटर गोमूत्र से 28 घंटे तक बल्ब जल सकता है।गोमूत्र के इस अनुंसधान ने आई.आई.टी और एचबीटीआई जैसे उच्च तकनीकी संस्थान भी हतप्रभ हैं।
    उन्होंने भी माना कि गोमूत्र में वह शक्ति है, जिससे बल्ब जल सकता है। गोशाला की इस अनोखी गोज्योति को देखकर अभी गुजरात के एक स्वयंसेवी संगठन ने दो हजार लैंप तैयार करने का ऑर्डर भी दिया है। इसका अति पिछड़े गैर विद्युतीकृत ग्रामीण इलाकों में वितरण किया जाएगा। ध्यान रहे कि कानपुर गोशाला सोसायटी ने बीते वर्ष ही गोबर से सीएनजी तैयार की थी, जिससे सफलतापूर्वक कार चलायी जाती है। गोशाला सोसायटी के सदस्य सुरेश गुप्ता बताते हैं कि अगर सरकार गो-ज्योति को प्रोत्साहित करे तो देश की वे झोपड़ियां भी सहजता से रोशन हो सकती हैं जहां अभी बिजली की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
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