आगरा के दयाल बाग के प्रेम विद्यालय में 9वीं की छात्रा ने दृष्टि ने एक ऐसी साइकिल बनायी है जिससे बिजली बनायी जा सकती है। पिता नितिन पहले साइंस रिसर्च फाउंडेशन (एसआरएफ) में काम करते थे। वर्तमान में दयालबाग सत्संग सभा में सेवादार हैं। चेन्नई में आई बाढ़ में दृष्टि के कुछ रिश्तेदार फंस गए थे। इलेक्ट्रिक सप्लाई बंद होने से कांटेक्ट नहीं हो पा रहा था। सभी के मोबाइल बंद हो गए थे और पूरा परिवार काफी दिनों तक परेशान रहा। इसके बाद दृष्टि के मन में ख्याल आया कि ऐसे हालात में बिजली की डिमांड को कैसे पूरा किया जाए। दृष्टि ने एक दिन साइकिल के पहिये की रगड़ से निकलने वाली लाईट (चिंगारी) देखी। यहीं से उसके मन में साइकिल से बिजली बनाने का आइडिया आया। दृष्टि ने अपनी 4 दोस्त असना, निशा, सूरत और स्नेहा के साथ मिलकर रिसर्च शुरू की। उसने बैट्री, अल्टानेटर, ब्रिज, इलेक्ट्रिक फायर, कैपीसीटर, वोल्टेज रेगुलेटर और एलईडी लाइट खरीदी। इन सारी चीजों को साइकिल में लगाकर एक डिवाइस बना दी।
दृष्टि ने बताया कि साइकिल जितनी तेज चलाई जाएगी, उतनी ज्यादा एनर्जी निकलेगी। मोबाइल चार्ज करने के लिए 2 किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ेगी। अगर आप चाहें तो साइकिल को स्टैंड पर लगाकर एक्सरसाइज करते हुए बिजली उत्पादन कर सकते हैं। साइकिल से बनने वाली बिजली से मोबाइल, लेटपटॉप, इमरजेंसी लाइट सहित अन्य गेजेट चार्ज कर सकते हैं। वहीं दृष्टि के टीचर का कहना है कि आने वाले समय में साइकिल में थोड़ा बदलाव किया जाएगा तो बाद में डिवाइस यह इनवर्टर की बैटरी भी चार्ज कर सकेगी।
