हिमालय की स्थिति देखते हुए वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी -बड़े भूकंप के लिए तैयार रहे - Today Time | Digital News Broadcasting | News Today Time | Today Time Group | Breaking Headline News
Headline
Loading latest headlines...

हिमालय की स्थिति देखते हुए वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी -बड़े भूकंप के लिए तैयार रहे

Translate Post:
    नई  दिल्ली।। वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय के क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर आठ से ज्यादा की तीव्रता का भूकंप कभी भी आ सकता है और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी इससे सुरक्षित नहीं रहेगी। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) के नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनजीआरआई) में सिसमोलॉजी के मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर डॉ. एनपी राव ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि हिमालय क्षेत्र में कभी भी रिक्टर पैमाने पर आठ या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आ सकता है। उन्होंने कहा, हमारी गणना के हिसाब से यह अपेक्षा से ज्यादा लंबित है। इसलिए हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। सीएसआईआर द्वारा उसके प्रमुख संस्थानों के वैज्ञानिकों और मीडिया के बीच आयोजित एक अनौपचारिक बातचीत में डॉ. राव ने कहा कि यदि इस तीव्रता से भूकंप आता है तो इससे 200 किलोमीटर के दायरे में बड़ी तबाही हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भूकंप की तीव्रता 8.5 या इससे अधिक रहती है तो दिल्ली भी सुरक्षित नहीं रहेगी। दिल्ली सिसमिक जोन चार में आता है जिसका मतलब है कि यहां भूकंप का खतरा काफी ज्यादा है। इसके अलावा यहां की घनी आबादी तथा अधिकतर पुराने मकानों का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक से नहीं होने के कारण यहां बड़े भूकंप की स्थिति में जानमाल का खतरा भी बहुत ज्यादा है।
अग्रिम चेतावनी की तकनीक नहीं
      सीएसआईआर के सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट आॅर्गेनाइजेशन के निदेशक प्रो. आरके सिन्हा ने कहा कि भूकंप की अग्रिम चेतावनी देने की तकनीक अभी नहीं है, लेकिन भूकंपीय तरंगों की तुलना में विद्युत चुम्बकीय तरंगों की रफ्तार अधिक होने का लाभ जरूर उठाया जा सकता है। जहां भूकंप आया है, वहां पहले से इसकी सूचना भले नहीं दी जा सकती हो, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों तक इसकी चेतावनी मोबाइल संदेशों के जरिये पहुंचाई जा सकती है।
वैज्ञानिक काम कर रहे तकनीक पर
     प्रो. सिन्हा ने बताया कि पिछली बार ंिहदुकूश इलाके में आये भूकंप के झटकों को दिल्ली तक पहुंचने में 83 सेकेंड का समय लगा था। बड़े नुकसान तथा जानहानि रोकने के लिए इतना समय काफी महत्वपूर्ण होता है। पिछले साल 26 अक्टूबर को आये भूकंप के झटके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के ही दो शहरों नोएडा और गुड़गांव में 10 सेकेंड के अंतर पर महसूस किये गये थे। यदि लोगों के मोबाइल पर सीधे संदेश भेजने का तरीका विकसित किया जा सके तो इससे नुकसान से बचा जा सकता है।

  • Loading Posts...