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मेट्रो ब्रिज के नीचे ‘फ्री स्कूल अंडर द ब्रिज’ : 2006 से यहाँ गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया जा रहा है

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Anurag Lakshya's photo.    किसी कवि ने लिखा हैः ”रावी की रवानी बदलेगी, सतलज का मुहाना बदलेगा, गर शौक में तेरे जोश रहा, तस्बीह का दाना बदलेगा, तू खुद तो बदल-तू खुद तो बदल, बदलेगा जमाना बदलेगा…। 
    देश के विकास के लिए सरकार को कोसने के बजाए, अगर हर नागरिक कुछ काम करे, तो हालात बदलने में देर नहीं लगेगी। कुछ इसी तरह की मिसाल दी है राजेश कुमार शर्मा ने।
     दिल्ली के यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन से थोड़ी दूर पर मेट्रो ब्रिज के नीचे ‘फ्री स्कूल अंडर द ब्रिज’ नाम से स्कूल चलाने वाले राजेश कुमार शर्मा साल 2006 से गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रहे हैं।
शर्मा कहते हैंः
       “मैं पहले पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ाता था, लेकिन खुले में बच्चों को पढ़ाने में काफी दिक्कतें होती थी। बाद में जब मेट्रो ब्रिज के नीचे खाली जगह दिखी, तो मैनें वर्ष 2010 में यह स्कूल खोल लिया। यहां गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है।”
Anurag Lakshya's photo.     यह स्कूल दो शिफ्ट में चलता है, जिसमें 270 गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जा रही है। पहली शिफ्ट सुबह 9 से 11:30 बजे तक चलती है, जिसमें केवल लड़के पढ़ते हैं। वहीं, दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 से 4 बजे तक चलती है, जिसमें लड़कियों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है।
     राजेश के अलावा और भी कई लोग हैं, जो समय निकालकर इन बच्चों को पढ़ाते हैं। इन्ही पढ़ाने वालों में से एक लक्ष्मीचन्द्र कहते हैंः “शिक्षा सबका अधिकार है और यह अधिकार सभी बच्चों को मिलना चाहिए”। लक्ष्मीचन्द्र कहते हैं कि बच्चों को पढ़ाने से उन्हें आत्मिक संतुष्टि मिलती है।
     पिछले तीन महीनों से इस स्कूल से जुड़ी कंचन यादव का मानना है कि इन बच्चों को पढ़ाना वह अपनी जिम्मेदारी मानती हैं। वह रोज इन बच्चों के लिए 2 घंटे का समय निकालती हैं।
     बच्चों को पढ़ाने वालों में श्याम महतो भी हैं जिनका मानना है कि शिक्षा ही इन गरीब बच्चों की दशा बदल सकती है।
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