कहाँ गायब हो रहे हैं छत्तीसगढ़ के आदिवासी?

Translate News:
     आदिवासियों के ईसाई बनने पर कड़ी निगाह रखने वाले हिंदू हृदय सम्राट आदिवासियों के खत्म हो जाने पर कतई चिंतित नहीं है। छत्तीसगढ़ की आबादी 2011 की जनगणना के हिसाब से 4.32 प्रतिशत बढ़ी लेकिन आदिवासियों की संख्या घट रही है। 2001 में बीजापुर की आबादी की वृद्धि दर 19.30 फीसदी थी जो 2011 में घटकर महज 8.76 फीसदी रह गई। ये लोग सभ्य लोगों की तरह कन्या भ्रूण हत्या भी नहीं करते। लेकिन सरकार चोरी-छिपे इनका परिवार नियोजन भी करा रही है। आदिवासियों का खात्मा किया जा रहा है। जो बच रहे हैं, वे पलायन पर मजबूर हैं।
     तीन साल में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से 29 हजार 190 लोग पलायन पर मजबूर हुए हैं। बलौदाबाजार से 23,005, महासमुंद जिले से 16.378, बेमेतरा से 10,180, राजनांदगांव से 9,419 लोगों को घर बार छो़ड़कर भागना पड़ा। साल के हिसाब से देखेंं तो (i)2013-13 में 22,149 (ii) 2013-14 में 27,830 (iii) 2014-15 में 45,945 लोग पलायन कर गए। खास बात ये भी है कि ये संख्या लगातार और तेजी से बढ़ रही है। है कोई इनका हिसाब लेने वाला ? ये जानकारी राजस्व मंत्री पंडित प्रेमप्रकाश पांडे ने विधानसभा में दी है।
Loading...

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top