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नई दिल्ली।। महिलाओं के लिए किसी बिजनेस की शुरुआत करना आसान नहीं होता है। यह तब और भी मुश्किल हो जाता है, जब फील्ड कुछ अलग हो। हम आपको ऐसी एक महिला के बारे में बता रहे हैं, जिसने बिजनेस की शुरुआत की तो सबसे पहले घर में सवाल खड़े हुए थे। यह महिला हैं रिचा कर, जिन्होंने ऑनलाइन अंडरगारमेंट बेचने के लिए ‘जिवामे’ की शुरुआत की। उस समय उनकी मां ने तो यह तक कह दिया था, मैं अपनी सहेलियों को कैसे बताऊंगी कि मेरी बेटी ब्रा-पैंटी बेचती है। आज उस बेटी ने अपने बिजनेस को अरबों का रुपए का बना दिया है। हम आपको इस महिला और उनके बिजनेस के बारे में बता रहे हैं….
सहेलियों से क्या कहूंगी-ब्रा और पैंटी बेचती है मेरी बेटी
रिचा ने नए तरह के बिजनेस में उतरने की बड़ी पहल तो कर दी थी, लेकिन उनके बिजनेस पर सबसे पहला सवाल घर से खड़ा हुआ। एक मीडिया रिपोर्ट में खुद रिचा भी यह बात मान चुकी हैं। रिचा के मुताबिक, उनकी मां ने कहा था,‘मैं अपनी सहेलियों से क्या कहूंगी। मेरी बेटी कम्प्यूटर पर ब्रा और पैंटी बेच रही है।’ रिचा के मुताबिक, मेरे पिता भी उस समय नहीं समझ पाए थे कि वास्तव में मैं क्या करना चाहती हूं। शुरुआत में अजीब-सी प्रतिक्रियाएं मिलीं। लोग मेरे बिजनेस पर हंसते थे।
सहेलियों से क्या कहूंगी-ब्रा और पैंटी बेचती है मेरी बेटी
रिचा ने नए तरह के बिजनेस में उतरने की बड़ी पहल तो कर दी थी, लेकिन उनके बिजनेस पर सबसे पहला सवाल घर से खड़ा हुआ। एक मीडिया रिपोर्ट में खुद रिचा भी यह बात मान चुकी हैं। रिचा के मुताबिक, उनकी मां ने कहा था,‘मैं अपनी सहेलियों से क्या कहूंगी। मेरी बेटी कम्प्यूटर पर ब्रा और पैंटी बेच रही है।’ रिचा के मुताबिक, मेरे पिता भी उस समय नहीं समझ पाए थे कि वास्तव में मैं क्या करना चाहती हूं। शुरुआत में अजीब-सी प्रतिक्रियाएं मिलीं। लोग मेरे बिजनेस पर हंसते थे।
रिचा ने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा था कि हमें बिजनेस शुरू करने के लिए जगह तलाशने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक मैं जब लैंडलॉर्ड से जगह के लिए बात कर रही थी तो अपने बिजनेस के बारे में बताने से पहले चुप हो गई और फिर मैंने उन्हें ऑनलाइन कपड़े बेचने की बात कही। इस तरह से मुझे ऑफिस स्पेस मिला। इसके अलावा जिवामे के लिए पेमेंट गेटवे हासिल करना खासा चैलेंजिंग रहा। लोगों का लॉन्जरी या अंडरगारमेंट को लेकर असहज होना बड़ा चैलेंज रहा, यह स्थिति आज भी है।
रिचा कहती हैं कि जब मैंने लॉन्जरी मार्केट के बारे में रिसर्च की तो पता चला कि महिलाएं अपने अंडरगारमेंट के बारे में खुलकर बात नहीं करतीं। बड़ी संख्या में महिलाओं को अपनी ब्रा का साइज तक नहीं पता होता। वे गलत साइज की ब्रा पहनती हैं। यह सब जानकर वह इस बिजनेस में उतरीं। आज उनकी कंपनी हर मिनट एक ब्रा बेच रही है। यही नहीं कंपनी की छोटे और मझोले शहरों में भी अच्छी पैठ है, जहां से उसे 30 फीसदी बिजनेस मिल रहा है।
8 साल नौकरी के बाद शुरू किया बिजनेस
ऐसे आया बिजनेस का आइडिया
यह था बिजनेस मॉडल
रिचा की जिवामे का बिजनेस मॉडल खासा अलग है। रिचा कहती हैं कि अधिकांश भारतीय महिलाओं को विभिन्न प्रकार की लॉन्जरी का अनुभव नहीं होता है और उन्होंने कभी अच्छे ब्रांड नहीं पहने होते हैं। वह कहती हैं कि मेरा टारगेट भारतीय महिलाओं की लॉन्जरी पहनने की आदतों को पूरी तरह बदलना था और उन्हें सही साइज के अंडरगारमेंट उपलब्ध कराना है। उनका बिजनेस मॉडल भी इसी पर आधारित है।
जिवामे में इन्होंने किया निवेश
– कलारी कैपिटल
– आईडीजी वेंचर्स
– रतन टाटा
– यूनीलेजर वेंचर्स
– जोडियस टेक्नोलॉजी फंड
– खजानाह नेशनल बेरहद
चार साल में पांच गुना हुआ बिजनेस
जिवामे की शुरुआत 2011 में हुई थी। सालाना आधार पर भारत में अंडर गारमेंट का बिजनेस 15 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। वहीं, रिचा की कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 300 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। कंपनी को लगभग 60 फीसदी रेवेन्यू इन-हाउस ब्रांड्स से मिलता है। प्रोडक्ट्स की क्वांटिटी की बात करें तो 2012 में लगभग 2 लाख प्रोडक्ट्स की शिपिंग की थी। वहीं, 2015 में यह आंकड़ा 10 लाख तक पहुंच गया। रिचा ने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा था कि वह जिवामे को एक अरब डॉलर की कंपनी बनाना चाहती हैं। हालांकि, रिचा ने अगले तीन से चार साल में 1,000 करोड़ रुपए का टर्नओवर हासिल करने का टारगेट रखा है। 2015 में कंपनी का टर्नओवर 270 करोड़ रुपए का रहा।
रिचा ने 2014 में फॉर्च्यून इंडिया की पहली ‘अंडर 40’ लिस्ट में सात महिलाओं को शुमार किया था। इस लिस्ट में केवल उन्हीं उद्यमियों व प्रोफेशनल्स को शामिल किया गया था, जिनकी उम्र 40 साल या उससे कम थी। ये ऐसी महिलाएं थीं, जिन्होंने अपने नायाब आइडिया को मुनाफा कमाने वाले बिजनेस में तब्दील करने में कामयाबी हासिल की थी। फॉर्च्यून इंडिया ने कहा था, ‘यह दरअसल एक ऐसी लिस्ट है। इसमें विभिन्न उद्यमियों को कोई भी रैंकिंग नहीं दी गई है।’
भारत में लॉन्जरी का मार्केट लगभग 12 हजार करोड़ रुपए का है। भले ही इस सेक्टर में कई कंपनियां हैं, लेकिन हमारे पास स्पष्ट तौर पर ऑनलाइन स्पेस की बड़ी हिस्सेदारी है। रिचा कहती हैं कि हमने कस्टमर एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल दिया है। एक कैटेगरी के तौर पर लॉन्जरी को अभी तक खास तवज्जो नहीं दी गई थी। सही साइज और स्टाइल के अंडरगारमेंट खरीदना खासा मुश्किल होता था। हमने इसी पर ध्यान केंद्रित किया।
