केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरों के आलावा देश के दूर-दराज गांवों में भी टॉयलेट बनाने की मुहिम चलाई हुई है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कर्मस्थली रहे देश के सबसे विकसित राज्यों में से एक गुजरात में आज भी मोबाइल फोन तो लगभग हर आदमी के पास है लेकिन टॉयलेट के लिए आज भी लोगों को जंगलों-खेतों जैसी सार्वजनिक जगहों का सहारा लेना पड़ रहा है। सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम- बेसलाइन सर्वे (SRS) के मुताबिक गुजरात में लगभग हर व्यक्ति के पास मोबाइल फोन है जबकि टॉयलेट के लिए अभी भी लोगों को सार्वजनिक जगहों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। SRS के साल 2014 से शुरू किए गए एक सर्वे में पाया गया है कि राज्य में करीब 98.3 लोगों के पास अपना मोबाइल है लेकिन सिर्फ 69.8 परसेंट लोगों को ही टॉयलेट उपलब्ध हो पाया है। इस टॉयलेट में भी बस 61 परसेंट में पानी की ठीक से व्यवस्था है।
सिर्फ गुजरात ही नहीं देश में भी यही स्थिति है। यूएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के करीब 102 करोड़ लोगों के पास मोबाइल फोन है जबकि को करीब 75 करोड़ लोगों के पास टॉयलेट मौजूद है। टॉयलेट उपलब्धि के मामले में लक्षदीप सबसे बेहतर राज्य है यहं करीब 97 परसेंट लोगों के पास टॉयलेट है. चंडीगढ़ और दिल्ली दूसरे और तीसरे नंबर पर है जबकि गुजरात 15वें नंबर पर है। ओडिशा और बिहार इस लिस्ट में सबसे बदतर राज्य हैं।
