संतों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखकर हिंदुओं के पलायन पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। इसके साथ पत्र के जरिये यह भी मांग की है कि इस्लामिक जिहाद को राष्ट्रीय व वैश्विक आपदा घोषित किया जाए।
देश में जगह-जगह हिंदुओं की दुर्दशा और पलायन से व्यथित होकर देश के तीन सर्व स्वीकार्य मठों के अधिष्ठाताओं ने अपने खून से खत लिेखा है।
खून से खत लिखने वालों में दूधेश्वरनाथ मठ के श्रीमहंत स्वामी नारायण गिरी जी महाराज, कालिकापीठ दिल्ली के महंत सुरेन्द्रनाथ जी अवधूत,सिद्धपीठ प्रचण्ड चण्डी देवी व महादेव मन्दिर डासना के महंत यति बाबा नरसिंहानंद सरस्वती जी महाराज शामिल हैं।
देश में जगह-जगह हिंदुओं की दुर्दशा और पलायन से व्यथित होकर देश के तीन सर्व स्वीकार्य मठों के अधिष्ठाताओं ने अपने खून से खत लिेखा है।
खून से खत लिखने वालों में दूधेश्वरनाथ मठ के श्रीमहंत स्वामी नारायण गिरी जी महाराज, कालिकापीठ दिल्ली के महंत सुरेन्द्रनाथ जी अवधूत,सिद्धपीठ प्रचण्ड चण्डी देवी व महादेव मन्दिर डासना के महंत यति बाबा नरसिंहानंद सरस्वती जी महाराज शामिल हैं।
हिंदू वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष बने नारायण गिरी जी महाराज
संतों ने सामूहिक निर्णय लेते हुए महंत सुरेंद्रनाथ जी अवधूत ने महंत नारायण गिरी जी महाराज को सनातन हिंदू वाहिनी का उत्तर प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है।
हिंदुओं से की जनसंख्या न घटने देने की अपील
तीनों संतों ने सरकार से समान नागरिक संहिता और कठोरतम जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने और हिंदू समाज से जनसंख्या अनुपात न घटने देने की अपील की है।
राजनैतिक व जातिगत स्वार्थों में बंटा हिंदू समाज
अपने खून से लिखे पत्र में पीएम से निवेदन किया है कि इस देश की राजनीति अब मानवभक्षी हो चुकी है। राजनैतिक व जातिगत स्वार्थों में बंटा हिंदू समाज आज इस्लामिक जिहादियों के लिए पूरे विश्व में बहुत नरम चारा बन चुका है।
संतों को नहीं बनना चाहिए राजनीति दलों का मोहरा
इस अवसर पर किसी का भी नाम लिए बिना इन तीनों संतों ने संयुक्त बयान में कहा कि संतों को राजनैतिक दलों का मोहरा बनकर हिंदुओं से विश्वासघात नहीं करना चाहिए। जो लोग धर्म से विश्वासघात करते हैं, उन्हें अपने आपको संत कहलाने का अधिकार नहीं है।
संतों को बलिदान दे धर्म को बचाने की जरूरत
आज जब सारे विश्व में इस्लामिक जिहादी आतंकवाद से लड़ने की तैयारी चल रही है। ऐसे में भारतवर्ष की राजनीति बहुत दयनीय तरीके से इस्लामिक जिहाद के सामने आत्मसमर्पण कर रही है। आज संतों को बलिदान देकर न केवल धर्म को बचाने की आवश्यकता है, बल्कि नेताओं का दलाल बनने से भी बचे रहना है।
जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की जरूरत
यदि बहुत जल्दी से सरकार ने समान नागरिक संहिता और कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाया, तो पूरे देश से हिंदुओं को हिंद महासागर में पलायन करना ही पड़ेगा।
...तब हिंदू खुद होंगे दुर्दशा के जिम्मेदार
तीनों संतों ने बड़े भावनात्मक स्वर में संपूर्ण हिंदू समाज से आग्रह किया कि जब तक भारत में जनसंख्या नियंत्रण का कठोर कानून नहीं बनता, तब तक हिंदू समाज अपनी जनसंख्या कम न होने दें, अन्यथा हिंदू अपने विनाश के जिम्मेदार खुद होंगे
संतों ने सामूहिक निर्णय लेते हुए महंत सुरेंद्रनाथ जी अवधूत ने महंत नारायण गिरी जी महाराज को सनातन हिंदू वाहिनी का उत्तर प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है।
हिंदुओं से की जनसंख्या न घटने देने की अपील
तीनों संतों ने सरकार से समान नागरिक संहिता और कठोरतम जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने और हिंदू समाज से जनसंख्या अनुपात न घटने देने की अपील की है।
राजनैतिक व जातिगत स्वार्थों में बंटा हिंदू समाज
अपने खून से लिखे पत्र में पीएम से निवेदन किया है कि इस देश की राजनीति अब मानवभक्षी हो चुकी है। राजनैतिक व जातिगत स्वार्थों में बंटा हिंदू समाज आज इस्लामिक जिहादियों के लिए पूरे विश्व में बहुत नरम चारा बन चुका है।
संतों को नहीं बनना चाहिए राजनीति दलों का मोहरा
इस अवसर पर किसी का भी नाम लिए बिना इन तीनों संतों ने संयुक्त बयान में कहा कि संतों को राजनैतिक दलों का मोहरा बनकर हिंदुओं से विश्वासघात नहीं करना चाहिए। जो लोग धर्म से विश्वासघात करते हैं, उन्हें अपने आपको संत कहलाने का अधिकार नहीं है।
संतों को बलिदान दे धर्म को बचाने की जरूरत
आज जब सारे विश्व में इस्लामिक जिहादी आतंकवाद से लड़ने की तैयारी चल रही है। ऐसे में भारतवर्ष की राजनीति बहुत दयनीय तरीके से इस्लामिक जिहाद के सामने आत्मसमर्पण कर रही है। आज संतों को बलिदान देकर न केवल धर्म को बचाने की आवश्यकता है, बल्कि नेताओं का दलाल बनने से भी बचे रहना है।
जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की जरूरत
यदि बहुत जल्दी से सरकार ने समान नागरिक संहिता और कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाया, तो पूरे देश से हिंदुओं को हिंद महासागर में पलायन करना ही पड़ेगा।
...तब हिंदू खुद होंगे दुर्दशा के जिम्मेदार
तीनों संतों ने बड़े भावनात्मक स्वर में संपूर्ण हिंदू समाज से आग्रह किया कि जब तक भारत में जनसंख्या नियंत्रण का कठोर कानून नहीं बनता, तब तक हिंदू समाज अपनी जनसंख्या कम न होने दें, अन्यथा हिंदू अपने विनाश के जिम्मेदार खुद होंगे
