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30 साल से ज्यादा उम्र वालों के लिए कैंसर टेस्ट अनिवार्य

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    नई दिल्ली।। भारत में कैंसर के तेजी से बढ़ रहे मरीजों को देखते हुए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। अब 30 वर्ष से ऊपर की उम्र वाले सभी महिला-पुरुषों के लिए कैंसर की स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी गई है। यह व्यवस्था नवंबर 2016 से लागू होगी।
     इससे पहले बीते दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में पहली बार कैंसर पर संयुक्त गाइड लाइन जारी की है। इसे बनाने में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेन्शन एंड रिसर्च (एनआईसीपीआर), विश्व स्वास्थ्य संगठन व एम्स जैसे 30 से ज्यादा कैंसर विशेषज्ञों एवं संस्थानों का सहयोग लिया गया है।
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर तैयार की गई गाइड लाइन का ड्राफ्ट गत 29 अगस्त को एनआईसीपीआर द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपा गया था, जिसके बाद मंत्रालय ने सभी प्रकार के कैंसर के लिए संयुक्त गाइडलाइन जारी कर दी। इसे संस्थान की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है।
     कैंसर के खिलाफ जंग को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) से जोड़कर ही चलाने का फैसला किया है। इसलिए पहले से चल रहे नेशनल प्रोग्र्राम फॉर द प्रिवेन्शन कंट्रोल ऑफ कैंसर, डायबिटीज, कार्डियोवैस्कुलर, डिजीज एंड स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) कार्यक्रम को गाइडलाइन में शामिल कर लिया है।
30 वर्ष के ऊपर के लोगों में कैंसर की आशंका : 
     लगातार बदलती जीवनशैली व खान-पान के साथ सिगरेट, तंबाकू एवं शराब की लत के कारण लोग कई तरह के गैर संचारी रोग की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे लोगों में 30 वर्ष की उम्र से ही कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए संस्थान ने 30 वर्ष से अधिक उम्र वाले सभी हाइपरटेंशन व डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को साल में एक बार व अन्य लोगों को पांच साल में एक बार कैंसर की स्क्रीनिंग को अनिवार्य बताया है। ताकि समय रहते बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।
तीन तरह के कैंसर पर ज्यादा फोकस : 
     एनआईसीपीआर, नोएडा के निदेशक डॉ. रवि मेहरोत्रा ने बताया कि गाइडलाइन में सबसे ज्यादा मुख, सर्वाइकल व स्तन कैंसर पर फोकस किया गया है। क्योंकि सबसे ज्यादा मरीज इन्हीं तीनों कैंसर के हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रतिवर्ष एक लाख 44 हजार से अधिक नई महिलाएं स्तन कैंसर से पीड़ित हो रही हैं। इनमें से करीब 50 फीसद महिलाओं की मौत हो जाती है। इसके साथ ही सर्वाइकल व मुख कैंसर के मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं।
राज्यों की भूमिका होगी अहमः 
     इस लड़ाई में राज्यों की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्क्रीनिंग केंद्रों का चयन करना राज्यों पर ही छोड़ा गया है। कैंसर के खिलाफ लड़ाई में इच्छा जाहिर करने वाले राज्यों की केंद्र हरसंभव मदद करेगा। उन्हें निर्धारित फंड भी जारी करेगा।
    लोगों में जागरूकता फैलाने, स्क्रीनिंग करने, बीमारी पर नियंत्रण पाने के साथ डायग्नोसिस, इलाज व टीम को प्रशिक्षित करने में एनआईसीपीआर अपना पूरा सहयोग देगा। इसके लिए राष्ट्रीय, राज्य व जनपद स्तर पर तीन कैडर बनाए जाएंगे।


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