Breaking News
Loading...

70 सालों से बिना खाएं-पिए जिंदा बने हुए हैं प्रह्लाद जानी, जानें सच्‍चाई




    आपने हाल ही चर्चा में आये उस व्‍यक्ति के बारे में सुना ही होगा, जिन्‍होंने दावा किया है कि उन्‍होंने पिछले 70 सालों से कुछ भी नहीं खाया है और न ही कुछ पिया है। इस कहानी के पीछे क्‍या सच है इसके बारे में किसी को भी सच्‍चाई ज्ञात नहीं है। ये हैं दुनिया के 7 सबसे खतरनाक देश, जहां जाने वाले बच कर नहीं आते हो सकता है कि कि ये महज ख्‍याति प्राप्‍त करने का तरीका हो या फिर से वाकई में कोई अद्भुत चमत्‍कार हो। इस दावे को ठोंकने वाले सज्‍जन का नाम, प्रह्लाद जानी है जो अपने आपके लिए ही ऐसा दावा करते हैं। कई बार लोगों को विश्‍वास नहीं होता है लेकिन जो लोग उन्‍हें जानते हैं उन लोगों को भी यकीन है कि प्रह्लाद, इतने सालों से बिना खाएं-पिएं हुए रहते हैं। इस बात को साबित करने के लिए प्रह्लाद जानी को दस दिनों तक अलग रखा गया और उन्‍हें खाने-पीने को कुछ नहीं दिया गया। यहां तककि उस दौरान, उन्‍हें नहाने या फ्रेश होने के लिए भी पानी नहीं दिया गया। हालांकि, इतना करने के बाद स्थिति संशय में ही बनी हुई है। प्रह्लाद जानी के बारे में कुछ बातें - प्रह्लाद जानी एक भारतीय साधु हैं जो अब दावा करते हैं कि उन्‍होंने पिछले 70 सालों से यानि सन् 1940 से कुछ भी खाया-पीया नहीं है। वह हर दिन सुबह 4 बजे से उठकर मेडीटेशन करते हैं और जीने के लिए ऊर्जा भी उन्‍हें ध्‍यान लगाने से ही मिलती है।
     ये हैं भारत के सबसे अमीर भिखारी, जिनके पास हैं लाखों के फ्लैट और.. मेडीकल ट्रायॅल - प्रह्लाद जानी के इस दावे के बाद उनके ऊपर दो परीक्षण किए गए। पहला परीक्षण 2003 में और दूसरा 2010 में किया गया। इस दौरान उन्‍हें हर प्रकार की सुख-सुविधा या खान-पान की जरूरतें नहीं दी गईं। urine परीक्षण के दौरान- परीक्षण के दौरान उन पर कड़ी निगरानी रखी गई। उन्‍हें एक अस्‍पताल में अलग रखा गया, जो कि अहमदाबाद में स्थित था। उन्‍हें नहाने के लिए भी पानी नहीं दिया गया। इस दौरान, डॉक्‍टरों ने बताया कि उन्‍हें न ही पेशाब होती है और न ही उन्‍हें स्‍टूल आता है। लेकिन उनके वजन में हल्‍की सी गिरावट आई है और शुरूआत में उनके ब्‍लेडर में यूरिन भी पाई गई थी जो कि बिना पानी पिएं संभव नहीं है। इसलिए, उस शोध में संशय की स्थिति बनी ही रही। camera 2010 के ऑब्‍जर्वेशन के दौरान... 2003 के बाद उनका अगला परीक्षण 2010 में किया गया। जिसमें उन्‍हें बहुत सारी तकनीकी से जोड़कर कड़ी निगरानी में रखा गया। इस रिसर्च टीम में डा. सुधीर शाह थे और 35 अन्‍य लोग भी शामिल थे।
       यह पूरी टीम, इंडियन डिफंस इंस्‍टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी और एलाइड सांइस (डीआईपीएएस) की थी, जिन्‍होंने एक साथ इस रिसर्च को किया।रह्लाद जानी के क्रियाकलापों को रिकॉर्ड किया गया - इस दौरान साधु को 10 दिन के लिए कैमरा की नज़र में रखा गया और उन्‍हें इसकी जानकारी नहीं दी गई। इस दौरान, उनके शरीर में कोई परिवर्तन या गिरावट नहीं देखी गई। लेकिन उनके शरीर को देखकर रिसर्च टीम चक्‍कर में पड़ी हुई है कि बिना खाये-पिए कोई कैसे जिंदा है और उसके शरीर के सभी अंग सही से काम कैसे कर रहे हैं। diet अमेरिकन डाइटेटिक एसोसिएशन - न्‍यूट्रीशयन रिसर्चर पीटर क्लिफ्टन, इस बार और रिसर्च दोनों से इंकार करते हैं। उन्‍हें लगता है कि इसमें किसी प्रकार की धोखाधड़ी है क्‍योंकि जानी को कुल्‍ला करने और नहाने के दौरान पानी दे दिया गया था और तभी उन्‍होंने उसे पी लिया होगा। लेकिन कुछ और देशों के शोधकर्ता भारत से प्रह्लाद जानी पर शोध करने की अनुमति मांग रहे हैं ताकि वो असलियत का पता लगा पाएं।