

सऊदी अरब, यमन, सीरिया, इराक, ईरान जो की अरब के मुस्लिम देश हैं, इन देशों के लाखों नागरिकयूरोप की शरण में पहुँच गए हैं। हज़ारो मुस्लिम अरब देशों से बाहर निकलकर इस्लाम को छोड़ या तो अन्य धर्म अपना रहे है या नास्तिक बन रहे हैं। फिर चाहे वो नागरिक जर्मनी के हो, फ्रांस के हो, इंग्लैंड के हो, या फिर के अमरीका हो।इस्लाम छोड़ने में मुस्लिम महिलाओं की तादात ज़्यादा हैं। एक अनुमान के हिसाब अगर 100 मुस्लिम देश छोड़ रहे हैं तो उसमें 60 महिलाएँ हैं और 40 पुरुषों की संख्या हैं।
महिलाओं के इस्लाम को छोड़ने के पीछे कई कारण हैं, जैसे की बूरखा पहनना, तीन तलाक़, पुरुषों के लिए बहु विवाह। मुस्लिम महिलाओं का कहना हैं कि नज़रें ख़राब पुरुषों की हैं और बूरखा महिलायें पहने। पुरुष को 72 हूर मिलेंगी तो महिलाओ को क्यों नहीं, तलाक़ का अधिकार केवल पुरुषों को क्यूँ हैं? मुस्लिम महिलाएं यूरोप या अन्य आज़ाद देशों में पहुचकर इस्लाम त्याग रही हैं।
असल में मुस्लिम देशों में इस्लाम त्याग नहीं सकते क्यूँकि मुस्लिम देशों में इस्लाम त्यागने पर मौत की सज़ा होती हैं। मुस्लिम देशों में मुस्लिम महिलाओं का जीवन नरक से भी बत्तर बन गया हैं। इसलिए हर कोई इस्लाम छोड़कर आज़ादी से जीना चाहता हैं। यूरोप में ही लाखो से ऊपर मुस्लिम लोग आकर रह चुके हैं। पुरुष वर्ग इस्लाम छोड़ने का ये तर्क दे रहे हैं कि वो हिंसा का समर्थन नहीं करते और दूसरों को काफ़िर नहीं बल्कि अपने जैसा इंसान मानते है।
आपको बता दे की भारत में भी ऐसे बहुत लोग हैं| कुछ लोग तो सोशल मीडिया पर अपनी पहचान के साथ सक्रीय भी हैं| भारत में ज्यादातर लड़कियां हैं जो इस्लाम छोड़ भारत में आकर बस गयी हैं| जिन्होंने इस्लाम छोड़ दिया हैं अब वो एक आम जिंदगी जी रहे हैं| और सभी अपनी जिंदगी से बहुत खुश हैं| सभी खुद को सुरक्षित भी महसूस करते हैं|
(Sunny Tamak)
