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चाय की दुकान ने बदल दी इन लोगो की ज़िन्दगी, बनाया दो इंजीनियर को करोड़पति

     यह कहानी है बरेली के रहने वाले दो इंजीनियर लड़को की इन्होंने साबित किया है की कोई भी आदमी अपनी मेहनत से अपने काम को चाहे वो छोटा हो या बड़ा उसे कामयाबी के शिखर तक पंहुचा सकता है देश बड़ी कंपनी में लाखों के पैकेज की नौकरी छोड़कर इन्होंने चाय का बिजनेस शुरू किया। और अपने इस बिजनेस को चाय कॉलिंग का नाम दिया आज इन्होंने बरेली से लेकर नोएडा तक चाय के आउटलेट खोल दिए है. इन युवाओं ने साबित करके दिखा दिया है कि अगर कोई काम मेहनत और लगन से किया जाए तो वह असानी से पूरा किया जा सकता है। वर्तमान युग में कुछ भी असंभव नहीं है |
      बरेली के रहने वाले इन इंजीनियर लड़को के नाम प्रमित शर्मा और अभिनव टंडन है आज इनके बरेली में 6 तथा नोएडा में 3 चाय के आउटलेट हैं। प्रमित शर्मा एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो वही अभिनव टंडन एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। ये दोनों देश की बड़ी कम्पनियों में लाखों के सालाना पैकेज पर नौकरी कर रहे थे।
      खुद का कारोबार करने की चाहत और कुछ अलग करने की सोच ने इनसे इनकी नौकरी छुड़वा दी। नौकरी छोड़ने के बाद दोनों ने मिलकर एक लाख रूपये में एक चाय का आउटलेट खोला और देखते ही देखते इनके कई आउटलेट खुल गए वर्तमान में इनके बिजनेस का टर्न ओवर एक करोड़ रूपये का हो गया हैं। अपने इस बिजनेस से ये दोनों लगभग 35 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। आज चाय कॉलिंग के इस आउटलेट पर लगभग 15 प्रकार की वैराइटी की चाय बेचीं जा रही हैं। इन्होंने अपने आउटलेट पर होम सप्लाई की भी व्यवस्था की है किसी भी व्यक्ति के फोन करने पर 15 मिनट के अंदर चाय उसके घर तक पहुंच जाती है।
इन्होंने चाय कॉलिंग की शुरुआत करके उन युवाओं के लिए एक उदाहरण पेश किया हैं जो पढ़ाई व अन्य कारणों में सफल ना होने पर आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। ऐसे में अन्य युवाओं को इनसे सीख लेने की जरूरत हैं |
चाय वाला बना वेब डेवलपर
     इसी प्रकार की एक कहानी है मुंबई के रहने वाले राजू यादव की जिसने अपनी जिदंगी की शुरुआत चाय बेचकर की इस चाय ने राजू यादव को राजू से 'छोटू' बना दिया| राजू साउथ मुंबई के चीरा बाजार में चाय सप्लाई का काम करता था। तीन भाइयों में से सबसे बड़ा राजू ही था, राजू का परिवार बहुत गरीब था उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे। अत: घर की इस स्थिति के कारण राजू को चाय की दुकान पर काम करना पड़ा | उसे इस काम के 2,000 रुपये महीने के मिलते थे। लगभग छह महीने काम करने के बाद उसे पास के ही एक ऑफिस में जॉब मिल गई, जहां वह कभी चाय पहुंचाया करता था | इस कंपनी का नाम सगाईडॉटकॉम था । यही सगाईडॉटकॉम बाद में शादीडॉटकॉम में बदल गयी।
     राजू का कहना था कि शादीडॉटकॉम में काम करने वाले लोग मुझे हमेशा पढऩे के लिए कहते थे। मैंने उनकी बात मानकर कंपनी से तीन महीने की छुट्टी लेकर 10वीं की परीक्षा दी, 10वीं की परीक्षा मैने 61 प्रतीशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की इसके बाद मैने 12वीं भी अच्छे नम्बरो से पास की । राजू ने बताया कि वह मुंबई यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के साथ ही वह वेब डिवेलपमेंट का काम भी सीखता रहा। जिससे वह एक अच्छा वेब डेवलपमेंट बन गया| इसके बाद उसने शॉदीडॉटकॉम में वेब डिवेलपर की पोस्ट पर अप्लाई किया और वह उसमे सेलेक्ट हो गया। शादीडॉटकॉम के मालिक अनुपम मित्तल ने बताया कि हमने राजू का इंटरनल रिव्यू प्रोसेस लेने के बाद ही उसे वेब डिवेलपर के रूप में हमारी कंपनी में प्रमोट किया है ।