
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी यात्रा का हाइटेक रथ अपने सफर में कुछ दूर जाते ही रास्ते में खराब हो गया, नतीजतन अखिलेश को कार से आगे का सफर शुरू करना पड़ा.
लखनऊ के लामार्टीनियर मैदान से रवाना हुआ बसनुमा रथ बमुश्किल एक किलोमीटर दूर जाकर तकनीकी खराबी की वजह से रुक गया. उसे ठीक करने के लिये फौरन कोशिश शुरू की गयी.
दुनिया में
रईसों की गाड़ियां बनाने वाली कम्पनी मर्सिडीज द्वारा तैयार की गयी इस बस
के अप्रत्याशित रूप से अचानक खराब होने से यात्रा कुछ देर रुकी रही लेकिन
रथ ठीक होने में देर होते देख मुख्यमंत्री कार पर सवार होकर आगे के सफर पर
निकल गये.
मालूम हो कि 10 पहियों वाली मर्सिडीज बस को रथ के तौर पर पेश किया गया है. बुलेटप्रूफ बॉडी, शीशों और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस बस को मुख्यमंत्री की जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है.
बस के अंदरूनी हिस्से को दो भागों में बांटा गया है. पहला हिस्सा मुख्यमंत्री के लघु कार्यालय जैसा है, जिसमें अखिलेश पांच-छह लोगों के साथ बैठक कर सकते हैं. दूसरे हिस्से में रसोई, शौचालय तथा बाथरूम इत्यादि बनाये गये हैं.
बस में एक विशेष एलीवेटर बनाया गया है जिस पर चढ़कर मुख्यमंत्री जहां चाहें, जनता को सम्बोधित कर सकेंगे. बस में फोर-जी स्पीड वाले इंटरनेट की भी सुविधा है ताकि मुख्यमंत्री सोशल मीडिया से लगातार जुड़े रहें. इसके जरिये वह वीडियो कॉलिंग भी कर सकेंगे. इस रथ की अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये है.
काम की बदौलत फिर बनेगी सपा सरकार: अखिलेश
अखिलेश यादव ने कहा कि उप्र को विकास के पथ पर ले जाने और जनता की भलाई के लिए पिछले करीब चार वर्षो के दौरान सरकार ने कई ऐतिहासिक काम किए हैं. इन्हीं की बदौलत प्रदेश में एक बार फिर सपा की सरकार बनेगी. उन्होंने कहा, "सरकार ने पिछले चार वर्षो में कई काम किए हैं. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, लखनऊ मेट्रो, समाजवादी पेंशन, लैपटप वितरण सहित कई योजनाएं चलाई गई हैं, जिसका सीधा लाभ जनता को मिला है."
मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की सरकार ने शहरों को गांवों से जोड़ने का काम किया है. जिला मुख्यालयों को भी गांवों से जोड़ने का काम किया गया है. जनता को भरपूर बिजली मुहैया कराई जा रही है. समाजवादी पेंशन योजना के तहत 55 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं.
अखिलेश ने इस दौरान कार्यकर्ताओं से कहा कि रथयात्रा को सफल बनाने के साथ ही पांच नवंबर को पार्टी के रजत जयंती समारोह को भी सफल बनाना है.
अखिलेश ने पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा पर जारी तनाव और दिल्ली में मंगलवार को 'वन रैंक वन पेंशन' (ओआरओपी) लागू करने की कथित मांग को लेकर एक पूर्व सैनिक द्वारा की गई खुदकुशी को लेकर केंद्र सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि सीमा पर हर रोज जवान शहीद हो रहे हैं तो पूर्व सैनिक भी आत्महत्या कर रहे हैं. इस बारे में केंद्र सरकार को गंभीरता से सोचना होगा.
मालूम हो कि 10 पहियों वाली मर्सिडीज बस को रथ के तौर पर पेश किया गया है. बुलेटप्रूफ बॉडी, शीशों और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस बस को मुख्यमंत्री की जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है.
बस के अंदरूनी हिस्से को दो भागों में बांटा गया है. पहला हिस्सा मुख्यमंत्री के लघु कार्यालय जैसा है, जिसमें अखिलेश पांच-छह लोगों के साथ बैठक कर सकते हैं. दूसरे हिस्से में रसोई, शौचालय तथा बाथरूम इत्यादि बनाये गये हैं.
बस में एक विशेष एलीवेटर बनाया गया है जिस पर चढ़कर मुख्यमंत्री जहां चाहें, जनता को सम्बोधित कर सकेंगे. बस में फोर-जी स्पीड वाले इंटरनेट की भी सुविधा है ताकि मुख्यमंत्री सोशल मीडिया से लगातार जुड़े रहें. इसके जरिये वह वीडियो कॉलिंग भी कर सकेंगे. इस रथ की अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये है.
काम की बदौलत फिर बनेगी सपा सरकार: अखिलेश
अखिलेश यादव ने कहा कि उप्र को विकास के पथ पर ले जाने और जनता की भलाई के लिए पिछले करीब चार वर्षो के दौरान सरकार ने कई ऐतिहासिक काम किए हैं. इन्हीं की बदौलत प्रदेश में एक बार फिर सपा की सरकार बनेगी. उन्होंने कहा, "सरकार ने पिछले चार वर्षो में कई काम किए हैं. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, लखनऊ मेट्रो, समाजवादी पेंशन, लैपटप वितरण सहित कई योजनाएं चलाई गई हैं, जिसका सीधा लाभ जनता को मिला है."
मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की सरकार ने शहरों को गांवों से जोड़ने का काम किया है. जिला मुख्यालयों को भी गांवों से जोड़ने का काम किया गया है. जनता को भरपूर बिजली मुहैया कराई जा रही है. समाजवादी पेंशन योजना के तहत 55 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं.
अखिलेश ने इस दौरान कार्यकर्ताओं से कहा कि रथयात्रा को सफल बनाने के साथ ही पांच नवंबर को पार्टी के रजत जयंती समारोह को भी सफल बनाना है.
अखिलेश ने पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा पर जारी तनाव और दिल्ली में मंगलवार को 'वन रैंक वन पेंशन' (ओआरओपी) लागू करने की कथित मांग को लेकर एक पूर्व सैनिक द्वारा की गई खुदकुशी को लेकर केंद्र सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि सीमा पर हर रोज जवान शहीद हो रहे हैं तो पूर्व सैनिक भी आत्महत्या कर रहे हैं. इस बारे में केंद्र सरकार को गंभीरता से सोचना होगा.
