ब्राह्मण होने के बावजूद इसलिए दफनाई गई जयललिता

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ब्राह्मण होने के बावजूद इसलिए दफनाई गई जयललिता

    जयललिता ब्राह्मण थीं ऐसे में दाह संस्कार की जगह उन्हें दफनाए जाने को लेकर लोगों में जानने की उत्सुकता है.
     जयललिता आस्था रखने वाली महिला थीं और वह नियमित रूप से अपने माथे पर आयंगर नमम लगाती थीं तो ऐसे में राज्य सरकार और शशिकला के परिवार ने आयंगर प्रथा का पालन करने की बजाय उन्हें दफनाने का फैसला क्यों किया? जबकि आयंगरों में दाह-प्रथा प्रचलित है.
     मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जयललिता के अंतिम संस्कार कार्यक्रम से जुड़े सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऐसा करने के पीछे वजह बताई. अधिकारी ने कहा, द्रविड़ आंदोलन से उपजी पार्टी की नेता होने के कारण ‘वह हमारे लिए आयंगर नहीं थीं. वह किसी जाति एवं धार्मिंक पहचान से परे हो गई थीं.
      यहां तक कि पेरियार, अन्ना दुरई और एमजीआर सहित ज्यादातर द्रविड़ नेता भी दफनाए गए थे. नेताओं के दाह-संस्कार करने की हमारे पास कोई मिसाल नहीं है. इसलिए हम शवों को चंदन और गुलाब जल के साथ दफनाते हैं.’
     नेताओं के स्मारक बनाए जाने से उनके समर्थकों एवं प्रशंसकों को अपने नेताओं को याद रखने में मदद मिलती है. द्रविड़ आंदोलन से जुड़े नेता नास्तिक रहे हैं. द्रविड़ नेता सिद्धांत रूप से ईर और उनसे जुड़े प्रतीकों को नकारते रहे हैं.
     लेकिन यह देखना दिलचस्प है कि द्रविड़ों में भी ईश्वर में अविश्वास की जगह प्रतिमाओं एवं स्मारकों ने ले ली है. प्रशंसक और अनुयायी मानते हैं कि वे अब भी मरीना बीच पर एमजीआर की घड़ी की टिक-टिक की आवाज सुन सकते हैं.
     तमिलनाडु के नेताओं के अंतिम संस्कार के साक्षी रहे एक वरिष्ठ राजनीतिक समीक्षक ने कहा कि जयललिता को दफनाए जाने के पीछे एक से अधिक कारण हो सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘चूंकि, जयललिता आस्था रखने वाली महिला थीं, ऐसे में लोग उम्मीद करते थे कि उनकी मौत के बाद उन्हें जलाया जाए लेकिन ऐसा करने के लिए जयललिता के परिवार के किसी सदस्य की जरूरत पड़ती. जयललिता की एक ही सगी रिश्तेदार दीपा जयकुमार है.
      दीपा जयललिता के दिवंगत भाई जयाकुमार की बेटी है. स्पष्ट है कि शशिकला का परिवार नहीं चाहता होगा कि दीपा अंतिम संस्कार में शामिल हो और उन्हें किसी तरह की चुनौती पेश करे.’

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