यह आयुर्वेदिक नुस्खे जो आपके जीवन में भर देंगे जोश

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Related image     अपनी आयु और शारीरिक अवस्था को ध्यान में रख कर उचित और आवश्यक मात्रा में, पौष्टिक शक्तिवर्धक चीजों को लेना हमारे शरीर को सालभर के लिए एनर्जी देता है। आयु और शारीरिक अवस्था के मान से अलग-अलग पदार्थ सेवन करने योग्य होते हैं।
    अपने मन व शरीर को रोगों से बचाए रखने के लिए आयुर्वेद आवश्यक व उचित प्रबन्ध व प्रयत्न ही सिखलाता है। सम्पूर्ण जीव जगत सुखी रहे यही आयुर्वेद का लक्ष्य है।
    आज हम पहले ऐसे पौष्टिक पदार्थों की जानकारी दे रहे हैं। जो किशोरवस्था से लेकर प्रोढ़ावस्था तक के स्त्री-पुरुष सर्दियों में सेवन कर अपने शरीर को पुष्ट, सुडौल, व बलवान बना सकते हैं।
च्यवनप्राश अवलेह (अष्टवर्गयुक्त) : सप्त धातुओं को बढ़ाकर शरीर का काया कल्प करने की प्रसिद्ध औषधि। फेफेड़े के विकार, पुराना श्वास, खांसी, शारीरिक क्षीणता, पुराना बुखार, खून की कमी, कैल्शियम की कमी, क्षय, रक्तपित्त, रक्त क्षय, मंदाग्नि, धातु क्षय आदि रोगों की प्रसिद्ध औषधि। इसमें स्वाभाविक रूप से विटामिन 'सी' पर्याप्त मात्रा में होता है। बल, वीर्यवर्धक है। मात्रा 10 से 25 ग्राम (2-4 चम्मच) दूध के साथ सुबह-शाम सोते समय।
सुपारी पाक : बच्चा होने के बाद महिलाओं को इसका सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से गर्भावस्था और प्रसवकाल की दुर्बलता दूर होकर शरीर पुष्ट व स्वास्थ्य उन्नत होता है। रक्तपित्त, क्षय, उरक्षत, प्रमेह नाशक, व वीर्यवर्धक, प्रदर रोग नाशक, मूत्रघात नाशक, गर्भाशय संबंधी रोगों में लाभकारी। मात्रा 10 से 15 ग्राम-प्रातः सायं दूध से।
हरिद्राखंड : शीत पित्त (पित्ती), चकत्ते, खुजली, विस्फोट (फफोले), दाद, एलर्जी, आदि रोगों की प्रसिद्ध औषधि। नियमित प्रयोग से शरीर की कांति बढ़ाता है। मात्रा 5 से 10 ग्राम दूध अथवा जल से।
सिद्ध घृत फलकल्याण घृत (फल घृत) : स्त्रियों के शरीर या कमर का दर्द तथा कमजोरी दूर करता है, गर्भ का पोषण करता है, गर्भिणी स्वस्थ रहती है तथा सुंदर संतान की जननी बनती है। गर्भाशय के रोगों में गुणकारी एवं बन्धया स्त्रियों को हितकारी। मात्रा 5 से 10 ग्राम प्रातः-सायं दूध के साथ।
बादाम पाक (केशर व भस्मयुक्त) : दिल और दिमाग को ताकत देता है। नेत्रों को हितकारी तथा शिरा रोग में लाभकारी। शरीर को पुष्ट करता है और वजन बढ़ाता है। सर्दियों में सेवन करने योग्य उत्तम पुष्टि दायक है। सभी आयु वालों के लिए पौष्टिक आहार। मात्रा 10 से 20 ग्राम प्रातः-सायं दूध से।
त्रिफला घृत : इसके सेवन से आंख की ज्योति बढ़ती है तथा रतौंध, आंखों से पानी बहना, खुजली पड़ना, रक्त दृष्टि, नेत्र पीड़ा और नेत्र विकार दूर होते हैं। त्रिफला के पूर्ण गुण होने के साथ-साथ स्निग्धता भी आती है अतः पेट साफ रहता है। मात्रा 5 से 10 ग्राम प्रातः-सायं दूध के साथ।
ब्रह्म रसायन : शारीरिक व मानसिक दुर्बलता दूर कर नवशक्ति का संचार करने वाला अपूर्व रसायन। श्वास, कास में लाभप्रद तथा दिमागी कार्य करने वालों के लिए उपयुक्त। मात्रा 3 से 10 ग्राम गर्म दूध के साथ सुबह-शाम लेना चाहिए।
मूसली पाक (केशरयुक्त) : अत्यंत पौष्टिक है। असंयमजनित रोगों को दूर कर शरीर को पुष्ट बनाता है। बल, वीर्यवर्धक, बाजीकारक एवं शक्तिदायक। शरद ऋतु में शक्ति संचय हेतु उपयुक्त। मात्रा 10 से 15 ग्राम प्रातः-सायं दूध से।
वासावलेह : सभी प्रकार की खांसी, श्वास, दमा, क्षय, रक्तपित्त, पुरानी खांसी के साथ खून आना, फेफेड़ों की कमजोरी आदि रोगों को नष्ट करता है। मात्रा 10 से 25 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ।
चित्रक हरीतिकी : पुराने और बार-बार होने वाले सर्दी-जुकाम (नजला) की अनुभूत दवा है। पीनस, श्वास, कास तथा उदर रोगों में गुणकारी एवं अग्निवर्धक। मात्रा 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम।
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