लगता है कि बार-बार की शिकायतों के बावजूद अपना ढर्रा न सुधारने वाले सरकारी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का वक्त आ गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सचिवों से कहा है कि वे ऐसे अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा और उन पर कार्रवाई की सिफारिश करें. इस कार्रवाई में बर्खास्तगी और पेंशन में कटौती तक शामिल है.
नियमों के तहत ग्रुप ए और बी के तहत आने वाले अधिकारियों पर इस तरह की कार्रवाई हो सकती है बशर्ते वे 35 साल की उम्र से पहले सरकारी सेवा में आए हों और दंडात्मक कार्रवाई के वक्त उनकी उम्र 50 साल हो चुकी हो. पेंशन रूल्स के मुताबिक 30 साल की सेवा पूरी करने के बाद किसी भी सरकारी सेवक को बर्खास्त किया जा सकता है. प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार के उन सभी विभागों से शिकायतों पर निगरानी रखने वाली एक व्यवस्था बनाने को भी कहा है जो सीधे आम जनता के संपर्क में रहते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक नरेंद्र मोदी ने यह आदेश उस समीक्षा बैठक में दिया जो वे हर महीने केंद्र सरकार के सचिवों और राज्य सरकार के मुख्य सचिवों के साथ करते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक नरेंद्र मोदी ने यह आदेश उस समीक्षा बैठक में दिया जो वे हर महीने केंद्र सरकार के सचिवों और राज्य सरकार के मुख्य सचिवों के साथ करते हैं. यह बैठक एक वेब आधारित इंटरफेस के जरिये हुई थी जिसे प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) नाम दिया गया है. एक सूत्र के शब्दों में, ‘हालांकि उन्होंने खासकर एक्साइज और कस्टम विभाग से ऐसे अधिकारियों को चिन्हित करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है, लेकिन संदेश सभी सचिवों और मुख्य सचिवों के लिए है.’
