एक विधायक ऐसा भी। जिसके पास न कार हैं, न गाड़ी है न बंगला है। रिक्शा इनके चलने की एकमात्र सवारी हैं। जि हां हम ठिक फरमा रहे हैं। आम तौर पर सब यही जानते है की विधायक बनने के बाद सभी नेता बड़ी-बड़ी गालियो से ही चलते है, और ये सच भी है। नेता छोटा हो या बड़ा हो, अगर वह सांसद, विधायक या विधान पार्षद बन गया तो उसके वारे-न्यारे हो जाते है। बंग्ला और गाड़ी तो उसके लिये आम बात हो जाती है। अगर आज के इस माहोल में कोइ विधायक ऐसा हो जिसके पास न गाड़ी हो न बंग्ला हो तो आप शायद यकिन नही करेंगे।
हम जिस विधयक के बारे में आपको बताने जा रहे है। वास्तव में उसके पास न तो बंगला है और न ही गाड़ी है। रिक्शा उसके चलने की एकमात्र सवारी है। यह विधायक है महबुब आलम। बलरामपुर से माले के विधायक हैं यह विधायक महोदय जब भी चलते हैं रिक्शे से ही चलते है। इनके बाॅडीगार्ड भी इनके साथ रिक्शे पर ही चलते है। सरकार हर विधायक को दो बाॅडीगार्ड देती है लेकिन रिक्शे पर जगह नही होने के कारण विधायक महोदय ने एक बाॅडीगार्ड को सरकार के पास वापस भेज दिया है। इनका कहना है की यह आम आदमी के विधायक है इसिलिये आम ही रहना चाहते है। चलिये जनाब भगवान से मनाइये हमारे सुबे के सभी विधायको को ऐसी सदबुद्धी आये वे भी आम जनता के आम विधायक बन जायें।
हम जिस विधयक के बारे में आपको बताने जा रहे है। वास्तव में उसके पास न तो बंगला है और न ही गाड़ी है। रिक्शा उसके चलने की एकमात्र सवारी है। यह विधायक है महबुब आलम। बलरामपुर से माले के विधायक हैं यह विधायक महोदय जब भी चलते हैं रिक्शे से ही चलते है। इनके बाॅडीगार्ड भी इनके साथ रिक्शे पर ही चलते है। सरकार हर विधायक को दो बाॅडीगार्ड देती है लेकिन रिक्शे पर जगह नही होने के कारण विधायक महोदय ने एक बाॅडीगार्ड को सरकार के पास वापस भेज दिया है। इनका कहना है की यह आम आदमी के विधायक है इसिलिये आम ही रहना चाहते है। चलिये जनाब भगवान से मनाइये हमारे सुबे के सभी विधायको को ऐसी सदबुद्धी आये वे भी आम जनता के आम विधायक बन जायें।
