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धिक्कार है ऐसी पत्रकारिता पर, इतिहास की पहली लाइन पता नहीं लेकिन पद्मावत मुवी अच्छी है

Related image      देखिए जी ये फिल्म राजपुतों की गाथा का गुणगान करती है। भले ही फिल्म में राजपुत राजा (शाहीद कपुर) को इतना कमजोर बताया गया है कि वह अपनी स्त्रीयों की रक्षा नहीं कर पाता है! फिर भी ये फिल्म राजपुतो का शान बढ़ाता है जी !
    मुगलों की परंपरा वाली घुमर नृत्य महरानी पद्मावति से करवा दिया फिर भी राजपुतों के शान को ठेस नहीं पहुंचाता है जी !
     सपने में पद्मावति से खिलजी रोमांस कर लेता है और खिलजी का सपना पुरे दुनियां को भी दिखा दिया जी, फिर भी मां पद्मावति की गरीमा को ठेस नहीं पहुंचाता है फिल्म !!
धिक्कार है ऐसी पत्रकारिता पर .........
    कल से  आजतक पर दुनिया देख रही है कि राउंड टेबल बहस हो रही, चैनल के सारे संपादक फिल्म देख कर आए और गुणगान किए जा रहे हैं, और जब कोई उन पर पक्षपात का आरोप लगाए तो वो हरियाणा, राजस्थान के रेप की घटना पर सवाल करने लगते हैं ! अरे दलालों तुम भी बताओं की रेप की किस घटना पर और कब सारे संपादक राउंड टेबल बहस किए हैं और निंदा की हो ? 
      बार-बार सफाई के लिए, फिल्म देखकर निकल रहे लोगों से आजतक के पत्रकार सवाल करते हैं कि मूवी कैसी लगी ? सारे लोग जबाब देने से पहले कहते "जी हमें इतिहास का नहीं पता, लेकिन मुवी में रणवीर सिंह (खिलजी) एकदम मस्त है जी, दीपीका भी मस्त लगी। मस्त मुवी है जी! 
इस जबाब से क्या साबित होता है जी जरा राजदीप सरदेसाई बताऐंगे ?
     जितने भी लोग मुवी देखकर निकले, पहली लाइन इतिहास की नहीं पता है हमें जी लेकिन मुवी अच्छी है! वैसे भंसाली ने सेंसर बोर्ड का मजाक भी बनाया है वो भी अंग्रेजी में। जरा अंग्रेजी में पद्मावत का T देखें, पहली बार T के ऊपर भी  . (डाॅट) देखा है जनाब हमने 😁😠
     ये कैसी सर्टीफिकेट है मूवी के लिए ? मतलब साफ है जिनको इतिहास पता नहीं वो क्या कहेंगे ?
अब सवाल भंसाली से :-
     भंसाली साहब क्या आपने सपने में कभी पडोसी या आपके दुश्मन के संग अपनी मां-बहन का रोमांस देखा है ?
     सवाल का जबाब देना, और जो लोग अभिव्यक्ति की आजादी की बात करते हैं, वो अपना तर्क दें॥
     पद्मावत फिल्म का विरोध जायज है, लेकिन हिंसा वाला तरीका गलत है। हिंसा आम लोगों के संग न हो, भंसाली एण्ड कंपनी के संग कुछ भी करो जायज होगा॥

(रूपेश कुमार ठाकुर)