दो निर्दलीय मुस्लिम उमीदवार खड़े होने के बाद भी अलवर में बीजेपी का सूपड़ा साफ

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No automatic alt text available.     राजस्थान के अलवर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. करण सिंह यादव ने बीजेपी उम्मीदवार डॉ. जसवंत सिंह यादव पर निर्णायक बढ़त बना ली है. कांग्रेस को 5,2,0434 जबकि बीजेपी को 3,75,520 वोट मिले हैं. अब बीजेपी यहां पर हार के कारण तलाश रही है, क्योंकि यह बीजेपी की सीट थी और राजस्थान में सत्ता भी बीजेपी की है.
      राजनीति के जानकारों का कहना है कि अलवर में बीजेपी की हार के पीछे गाय से संबंधित हिंसा का भी बड़ा हाथ बताया जा रहा है. इसकी वजह से मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण का मौका मिला. दूसरा बड़ा कारण खुद जसवंत सिंह के उस कथित बयान को बताया जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि "हिन्दू हो तो वोट मुझे देना मुस्लिम हो तो कांग्रेस प्रत्याशी कर्ण सिंह को वोट देना." यह विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. 
      इसकी वजह से भी मुस्लिम वोट एकतरफा पड़े. दिलचस्प बात यह है कि यहां पर कुल 11 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें से दो मुस्लिम इब्राहीम खान और जमालुद्दीन भी शामिल हैं, जो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे. इससे मुस्लिम वोट बंट सकते थे. लेकिन, इब्राहीम खान को सिर्फ 769 और जमालुद्दीन को 1454 वोट मिले हैं. यानी मुस्लिमों ने बिना किसी भ्रम के एक साथ कांग्रेस को वोट डाला.
      शेर मोहम्मद कहते हैं कि "पिछले दस माह की घटनाओं को देखें तो अलवर गाय संबंधित हिंसा का केंद्र रहा है. पहलू खान, उमर मोहम्मद और तालिम हुसैन गोतस्करी के नाम पर मारे जा चुके हैं. जिसमें से एक का तो पुलिस ने एनकाउंटर किया था. इसलिए पूरे मुस्लिम समाज में सत्ता के खिलाफ नाराजगी थी, जिसे वोट के जरिए लोगों ने प्रकट किया है."
     अलवर लाेकसभा सीट बीजेपी के महंत चांदनाथ के निधन के बाद खाली हुई थी. यहां बीजेपी ने वसुंधरा सरकार में श्रम एवं नियोजन मंत्री डॉ. जसवंत यादव को उम्मीदवार बनाया था. बीजेपी प्रवक्ता अनिल बलूनी का कहना है कि राजस्थान की हार के बारे में बयान जयपुर से मिलेगा.

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