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कोई दोबारा हिंदू बनता है तो एससी का दर्जा कायम - सुप्रीम कोर्ट

    नई दिल्ली।। सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्धर्मातरण के बाद भी व्यक्ति को अनुसूचित जाति (एससी) माने जा सकने का फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत का कहना है कि अगर व्यक्ति दोबारा धर्म परिवर्तन करके फिर से हिंदू बनता है तो वह अपना एससी का दर्जा बरकरार रख सकता है।
    जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस वी.गोपाल गौड़ा की खंडपीठ ने केरल निवासी याचिकाकर्ता केपी मनु के संबंध में कहा कि एक दलित जिसके माता-पिता या दादा-दादी ईसाई धर्म अपना चुके हैं वह वापस हिंदू धर्म अपनाने पर अपना एससी का दर्जा कायम रख सकता है। अगर उसके समुदाय ने उसे जाति से बाहर किया होता तो बात अलग हो सकती थी। इसलिए वापस हिंदू धर्म स्वीकार करने के बाद उसकी जाति बहाल हो सकती है।
    अदालत ने कहा कि जाति का लाभ लेने का दावा करने वाले व्यक्ति के पुनर्धर्मांतरण के बाद जारी सर्टीफिकेट में तीन बातों का उल्लेख होना चाहिए। उसमें इसका उल्लेख हो कि वह उस जाति से है जिसके लिए संविधान के तहत अनुसूचित जाति के 1950 के प्रावधान के तहत मान्यता है। दोबारा धर्मांतरण उसी धर्म में हुआ है जो उसके माता-पिता और उसके पुरखों का धर्म था। साथ ही उसके समुदाय ने उसे उस जाति में स्वीकार किया इसका भी सर्टीफिकेट में उल्लेख होना चाहिए।
    अदालत ने यह फैसला सामुदायिक समिति के सर्टीफिकेट के प्रामाणिक स्क्रूटनी कमेटी के फैसले को दरकिनार कर दिया है। उल्लेखनीय है कि मनु का जन्म ईसाई के रूप में ही हुआ था लेकिन बरसों पहले उनके दादा जी मूलत: हिंदू थे जिन्होंने बाद में ईसाई धर्म स्वीकार किया था। मनु जब 24 साल के हुए तो उन्होंने फिर से विधिवत हिंदू धर्म अपनाया।
    उसके बाद उन्हें उनके पूर्वजों की हिंदू पुलाया जाति का सर्टीफिकेट भी जारी किया गया था। लेकिन बाद में एक शिकायत निपटारा समिति ने इस आधार पर उनके सर्टीफिकेट को अस्वीकार कर दिया कि उनके पूर्वज ईसाई थे। और खुद मनु ने भी ईसाई युवती से शादी की थी। इसी कमेटी की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए उनके नियोक्ता को उन्हें नौकरी से निकालने का आदेश दिया था। साथ ही सेवा के दौरान उन्हें मिले 15 लाख रुपये वेतन भी वसूलने को कहा था।