शिक्षा के मंदिर में गुरु का ऐसा अपमान शायद ही कभी हुआ हो

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     गुजरात के कच्छ विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने एक प्रोफेसर को क्लासरूम से बाहर घसीट लिया। उनके चेहरे पर कालिख पोती, उनका मुंह काला किया। जमीन पर गिरा गिराकर बुरी तरह पिटाई की और कालिख सने प्रोफेसर का पूरे कैंपस में जुलूस भी निकाला। प्रोफेसर पर इन लोगों ने सिनेट चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। शिक्षा के मंदिर में गुरु का ऐसा अपमान शायद ही कभी हुआ हो।
     एबीवीपी से जुड़े ये गुंडे 'वंदे मातरम्' के नारे लगा रहे थे। वही 'वंदे मातरम्', जो आजादी की जंग में देश का प्रयाण गीत बन गया था और आजादी के बाद देश का राष्ट्रगीत बना। वही 'वंदे मातरम्', जो बीजेपी से जुड़े अधिकांश लोगों को पूरा याद तक नहीं है और वो मुसलमानों से वंदे मातरम् गवाने के लिए कलप रहे हैं।
      हाल ही में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का जन्मदिन था। यह सब देखकर उनकी आत्मा फूट-फूटकर रो रही होगी कि उनका रचा गीत अब गुजरात में गुंडों का नारा बन चुका है। आपको बताते चले की गुजरात में बीजेपी का राज है और एबीवीपी बीजेपी/संघ का ही अनुषंगिक संगठन है। बीजेपी तय करे कि वंदे मातरम् का नारा गुंडों के लिए है या देश के प्रति समर्पित नागरिकों के लिए। अगर बीजेपी, संघ और खुद एबीवीपी में जरा भी गैरत हो तो उन्हें आगे आकर इस मुद्दे पर सफाई देनी चाहिए। कच्छ के गुंडों की करनी पर पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।

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