शर्मनाक : अधिकारी और भाजपा नेताओं के सामने सड़क पर तड़पती रही गर्भवती महिला, प्रशासन बना रहा अंजान

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    यूपी की योगी सरकार स्वास्थ्य को लेकर करोड़ों रुपए का बजट प्रदेश के सभी जिलों में भेजती है। बावजूद इसके शायद जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही से आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं से वचिंत रखा जा रहा है। फिर चाहे गर्भवती महिला को अस्पताल तक पहुंचाने में एम्बुलेंस का मौके पर न पहुंचना हो या फिर लोगों को दवाईयों के लिये बाहर से दवाईयां लेने पर मजबूर होना हो। कहीं न कहीं यह आए दिन की समस्याए हैं। सरकार के अधिकारी जांच करने पहुंचते तो हैं लेकिन खानापूर्ति करके चले जाते हैं। आज तक किसी स्वास्थ्य अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।
     रायबरेली हरचंदपुर क्षेत्र के पहरावा निवासी रंजीत की पत्नी सुषमा दो माह की गर्भवती थीं। सुषमा को अचानक पेट में दर्द हुआ, परिजनों ने तुरंत इसकी सूचना वहां की आशा मंजू को दी। मौके पर पहुंची आशा ने 102 एंबुलेंस को फोन कर बुलाया और नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरचंदपुर पहुंचाया। जहां पर महिला डॉक्टर ने मामला गंभीर देख गर्भवती महिला को रायबरेली रेफर कर दिया। वहां की आशा बहू ने 102 नंबर एंबुलेंस को कॉल लगाने का प्रयास किया लेकिन कॉल नहीं लगा। लगभग 40 से 45 मिनट पीड़ित फर्श पर तड़पती रही। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य मेले का कार्यक्रम चल रहा था और किसी ने इस तरफ ध्यान देने का प्रयास नहीं किया। मीडिया के हस्तक्षेप के बाद डॉक्टरों ने आनन-फानन महिला को बेड पर लिटा कर उपचार शुरू कर दिया।
     स्वास्थ्य मेले में लगभग लगभग सारे डॉक्टर व भाजपा के लोग भी मौजूद थे। मगर किसी ने तड़पती महिला की ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा। अब सोचने वाली बात यह है कि जिस समय स्वास्थ्य मेला चल रहा हो जिले तक के अधिकारी मेले में मौजूद हो तब एक पीड़ित महिला फर्श पर तड़प रही हो आगे आप भी सोच सकते हैं की हरचंदपुर की स्वस्थ्य व्यवस्था क्या है।
     भाजपा जिलाअध्यक्ष रामदेव पाल से इस मामले में बात की तो उनका कहना है कि मैं मेले के कार्यक्रम में था लेकिन जब मै कार्यक्रम में गया तो यह महिला नहीं थी। कुछ समय बाद मैं बाहर निकला तो यह महिला का वहां पर मौजूद डाक्टर स्ट्रेचर पर इसका इलाज कर रहे थे। इसके बाद मै गाड़ी में बैठते-बैठते डिप्टी सीएमओ से महिला का सही इलाज करने के लिये बोलकर आया था। अब देखना होगा की इस मामले में कौन सही कह रहा है, कौन गलत बोल रहा है, लेकिन कहीं न कहीं जिले के स्वास्थ्य विभाग और उनके ऊपर बैठे अधिकारियो की ये जिम्मेदारी है। इस मामले में अगर स्वास्थ्य विभाग और सत्ता में बैठे पार्टी के लोग जब वहां मौजूद थे तो उनको अपनी प्राइवेट गाड़ी से अस्पताल पहुंचाना चाहिए था। 

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