अगले तीन महीने तक काम पर नहीं आएंगे हज़ारों दिहाड़ी मजदूर

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अगले तीन महीने तक काम पर नहीं आएंगे हज़ारों दिहाड़ी मजदूर

बॉर्डर पर फंसे मजूदर ना हों परेशान ...-खासतौर पर अाेवरसीज फिल्मों की शूटिंग को लेकर बना चुके मन
- 46 हजार में से सिर्फ 15 हजार वर्कर्स के पास ही हैं बैंक अकाउंट
     मुंबई में मौजूद बॉलीवुड के लिए काम करने वाले कुल 46 हजार दिहाड़ी मजदूरों में से 25 हजार मजदूर अपने घर लौट चुके हैं। ये 25 हजार फिल्मों के सेट पर स्पॉटबॉय, कारपेंटर और लाइट मैन का काम करते हैं। ये सभी सिर्फ 21 दिनों के लॉक डाउन पीरियड तक के लिए ही नहीं बल्कि कंप्लीट तीन महीने के लिए अपने-अपने होम स्टेट लाैट चुके हैं। डेली वेजेस वर्कर्स एसोसिएशन के अलावा स्टंट मैन एसोसिएशन और लाइट अटेंडेंट वालों के एसोसिएशन की तरफ से यह जानकारी दी गई है। सभी ने मौजूदा हालातों को देखते हुए मेकर्स से यह साफ कर दिया है कि वे अगले तीन महीने तक ओवरसीज शूट पर नहीं जाएंगे। ऐसे में कई बड़ी फिल्मों के मेकर्स पर कोरोना वायरस की स्थिति से बाहर निकलने के बाद भी अपनी फिल्में पूरी करने का संकट बना रहेगा। बड़ी बात यह है कि यह संकट सिर्फ मेकर्स पर ही नहीं इन वर्कर्स पर भी है क्योंकि इन 46 हजार में से महज 15 हजार के पास ही बैंक अकाउंट हैं। ऐसे में सरकार और फिल्मी सितारे उनकी मदद के लिए जो फंड इक्ठ्ठा कर रहे हैं, वह भी उन तक पहुंच पाएगा या नहीं इस पर भी कई सवाल खड़े हो जाते हैं। 
‘आगे समस्या और विकट हो जाएगी’
    अजय देवगन के साथ वर्षों से स्पॉट बॉय का काम करने वाले सुरेश दादा बताते हैं, ‘जिन लोगों के घर मुंबई में है वह तो यहीं हैं लेकिन ज्यादातर लोग यूपी, बिहार और झारखंड के हैं जो अपने-अपने घर निकल चुके हैं। अभी तो खैर ट्रेनें बंद हो गई वरना सभी अपने-अपने घर निकलने वाले थे। मेरे ख्याल से 25 से 30 हजार लोग बाहर निकल चुके हैं। मैं खुद अपने घर बिहार जाने वाला था लेकिन ट्रेनें बंद हो गईं। आगे चलकर यह समस्या बड़ी विकट होने वाली है। वह इसलिए कि अगर लॉक डाउन 14 अप्रैल तक खत्म होता भी है तो भी इन सभी मजदूरों ने फैसला किया कि वे 30 जून तक अपने-अपने घरों में ही रहने वाले हैं।’
खाैफ है बड़ी वजह
    वर्कर्स की इस तीन माह की छुट्‌टी की सबसे बड़ी वजह है उनका खौफ। विदेशों से कोरोना वायरस को लेकर जो खबरें आ रही हैं उससे लोगों में काफी डर बैठ चुका है। इसके चलते स्पॉट बॉय और लाइटमैन सबके दिलों में दहशत है। 
इन फिल्मों पर होगा असर
   अगर ये सभी मजदूर तीन महीनों तक काम पर नहीं लौटे तो जितनी भी बड़े बजट की फिल्मों की शूटिंग ओवरसीज में होने वाली थी, वे बुरी तरह से अफेक्ट होंगी। इसमें ‘मुंबई सागा’, ‘बंटी और बबली 2’, ‘शमशेरा’, ‘जर्सी’, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’, ‘सत्यमेव जयते 2’, ‘जयेशभाई जोरदार’, ‘लाल सिंह चड्ढा’ मुख्य हैं। इन सभी के कुछ पोर्शन ओवरसीज में शूट होने बाकी हैं। अब इनकी शूटिंग की तैयारियां मुंबई या फिर इंडिया के बाकी इलाकों में ही करने पर निर्माता-निर्देशक आपस में एक राय हो रहे हैं।
आर्ट डायरेक्टर्स को कर दिया है अलर्ट
   कई बड़ी फिल्मों के मेकर्स ने अपने आर्ट डायरेक्टर्स को अलर्ट कर दिया है कि अगर किसी सूरत में वे ओवरसीज शूटिंग के लिए नहीं जा पाए तो आर्ट डायरेक्टर्स मुंबई या भारत के दूसरे इलाकों के हिसाब से सेट डिजाइन करने शुरू कर दें। जो लोकेशन विदेश की पहाड़ी वादियों का था उसे बदलकर हिमाचल, कश्मीर या उत्तराखंड की पहाड़ी वादियों में शूट करें।
मुंबई की बारिश भी है बड़ा संकट
   अगर ये सभी वर्कर्स तीन महीने तक शूट पर नहीं गए तो मेकर्स के सामने इंडिया में भी फिल्म शूट करने में काफी मुश्किलें आएंगी। जून के बाद मुंबई में शूट करना काफी मुश्किल भरा हाेता है क्योंकि वहां भारी बरसात रहती है।
यह भी है मुसीबत : कैसे पहुचांए दान का पैसा
‘सितारे मदद कर रहे हैं पर मजदूरों तक हम पहुंचा नहीं पा रहे’
    फिल्म स्टूडियो सेटिंग एलाइड मजदूर यूनियन के महासचिव गंगेश्वर श्रीवास्तव बताते हैं, ‘हमारे स्पॉट, लाइट, कारपेंटर इन सब को मिलाकर टोटल 46000 लोग हैं। उनमें से 50 फीसदी अपने घर निकल चुके हैं। इन डेली वेजेस वर्कर्स के सामने एक और प्रॉब्लम खड़ी हो रही है। इनकी मदद के लिए सितारे जो पैसे दे रहे हैं वह उन तक तुरंत नहीं पहुंच पा रहा है। दरअसल, इन 46 हजार मजदूरों में से सिर्फ 15 हजार के पास ही बैंक अकाउंट हैं। इससे पहले पांच-छह सालों तक इन सबको कैश में ही पैसे दिए जाते थे। बहरहाल, यूनियन द्वारा इन सभी के घरों तक मदद की राशि ट्रांसफर की जाएगी। हमारे पास मदद के लिए सितारोंे की तरफ से कुल 4 करोड़ से ज्यादा की रकम आई है पर कंप्लीट लॉक डाउन होने की स्थिति में ऑफिस में बैठकर कागजी कार्यवाही करने में काफी दिक्कत हो रही है। हम सोमवार को इस संदर्भ में पुलिस से इजाजत लेंगे। इसके अलावा जो मुंबई में हैं उनमें से ज्यादातर के पास घर नहीं है। सब के सब भाड़े पर काम करते हैं। उनके पास मुंबई के राशन काॅर्ड भी नहीं हैं। ऐसे में उन्हें यहां से सरकारी मदद में मिलने में काफी दिक्कत होगी। ऐसी सूरत में फिल्म इंडस्ट्री के लोग ही हमारी मदद कर रहे हैं।’

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