जिंदादिली की अनूठी मिसाल: 1 फीट 9 इंच के जोशी नीनामा बने बांसवाड़ा में लोगों के आकर्षण का केंद्र
कुशलगढ़ (बांसवाड़ा)। "हौसलों के आगे शारीरिक बाधाएं भी घुटने टेक देती हैं"—इस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में कुशलगढ़ उपखंड के छोटे से गांव मिर्च घाटी (ग्राम पंचायत चोखवाड़ा) के रहने वाले 28 वर्षीय जोशी नीनामा।
मात्र 1 फीट 9 इंच के कद और पैरों से चलने में असमर्थ होने के बावजूद, अपनी गजब की जिंदादिली और हंसमुख स्वभाव के कारण जोशी आज पूरे इलाके में लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं।
चाहने वाले गोद में उठाकर कराते हैं सफर
एक गरीब आदिवासी परिवार में जन्मे 10वीं फेल जोशी नीनामा भले ही खुद अपने पैरों पर नहीं चल पाते, लेकिन उनके चाहने वालों की कोई कमी नहीं है। जब भी उन्हें घर से बाहर जाना होता है, तो गांव के लोग और उनके प्रशंसक उन्हें बड़े प्यार से अपनी गोद में उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाते हैं। वे जहां भी जाते हैं, उन्हें देखने के लिए लोगों का तांता लग जाता है।
धार्मिक आस्था और ईश्वर पर अटूट विश्वास
जोशी नीनामा धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। शारीरिक सीमाओं के बावजूद उन्होंने बाबा रामदेवरा, सांवलिया सेठ और पावागढ़ जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर दर्शन लाभ लिया है। गणेश चतुर्थी हो या अनंत चतुर्दशी, ग्रामीण उन्हें बड़े उत्साह के साथ पूजा पंडालों में लेकर जाते हैं।
लोग खुश होकर अपनी स्वेच्छा से जो भी आर्थिक सहयोग देते हैं, जोशी उसे ईश्वर का आशीर्वाद मानकर स्वीकार करते हैं और उसी से अपने परिवार का गुजर-बसर चलाते हैं।
संत नरसिंह गिरी महाराज ने जताया समर्थन
राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ भारत (केंद्रीय कार्यालय रामधाम आश्रम, कुशलगढ़) के राष्ट्रीय प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज ने जोशी नीनामा के बारे में बात करते हुए कहा:
"कद-काठी में इतने छोटे होने के बावजूद जोशी नीनामा का सनातन संस्कारों और धार्मिक आस्था से हमेशा गहरा जुड़ाव रहा है। पूरे क्षेत्र में जोशी जैसी जीवंतता किसी और में देखने को नहीं मिलती। हमारा संगठन जल्द ही उनके घर पहुंचकर उनकी स्थिति की जानकारी लेगा और हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।"
सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बावजूद जोशी को अपने चलने-फिरने में असमर्थ होने का मलाल जरूर है, लेकिन उनकी मुस्कान और सकारात्मकता आज हर किसी को जिंदगी जीने की एक नई प्रेरणा दे रही है।

