राजस्थान की तीन क्षत्राणियों ने गुजरात में लहराया सफलता का परचम, न्यायाधीश बनकर बढ़ाया प्रदेश और समाज का मान
जयपुर/गुजरात। वीरभूमि राजस्थान की माटी ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित किया है। प्रदेश की तीन प्रतिभाशाली बेटियों—बाईसा अदिति राठौड़, श्रीमती दीपू कंवर राठौड़ और सुश्री शिल्पा शेखावत—ने गुजरात न्यायिक सेवा (GJS) परीक्षा उत्तीर्ण कर न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला है। तीनों क्षत्राणियों की यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल राजस्थान और उनके परिवारों के लिए, बल्कि सम्पूर्ण समाज के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।
1. जोधपुर की बाईसा अदिति राठौड़ ने हासिल की 71वीं रैंक जोधपुर जिले के नांदड़ी निवासी बाईसा अदिति राठौड़ ने गुजरात न्यायिक सेवा में 71वीं रैंक प्राप्त कर सिविल जज बनने का सपना पूरा किया है। अदिति की प्रथम नियुक्ति आनंद जिले में अतिरिक्त सिविल जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) के पद पर हुई है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: अदिति के पिता श्री रविन्द्र सिंह राठौड़ कौशल एवं उद्यमिता विभाग में उप निदेशक हैं, जबकि माता श्रीमती सूरज कंवर जोधपुर के राजकीय विद्यालय में शिक्षिका हैं। अदिति ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिजनों के साथ-साथ अपने नाना श्री मूलसिंह भाटी (पूर्व डिप्टी, राजस्थान पुलिस) के कुशल मार्गदर्शन को दिया है।
2. संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल: श्रीमती दीपू कंवर राठौड़ (79वीं रैंक) बाड़मेर जिले के जालीपा गांव निवासी श्री लोकेन्द्र सिंह राठौड़ की धर्मपत्नी श्रीमती दीपू कंवर राठौड़ ने अपनी लगन से 79वीं रैंक हासिल की है। वर्तमान में वे वेरावल (गिर सोमनाथ) में 7वीं अतिरिक्त सिविल जज के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
असफलता को बनाया ढाल: मूल रूप से जामनगर निवासी दीपू कंवर ने विवाह और मातृत्व की जिम्मेदारियों के बावजूद पढ़ाई का सिलसिला जारी रखा। वर्ष 2022 में इंटरव्यू और 2023 में मेन्स में मिली असफलताओं से निराश होने के बजाय उन्होंने दुगनी मेहनत की और तीसरे प्रयास में सफलता का परचम लहरा दिया।
3. सीकर की सुश्री शिल्पा शेखावत ने पाई 85वीं रैंक सीकर जिले के सांवलपुरा गांव की सुश्री शिल्पा शेखावत (पुत्री श्री नरपत सिंह शेखावत) ने 85वीं रैंक के साथ गुजरात न्यायिक सेवा परीक्षा पास की है। उनका चयन आनंद जिला न्यायालय में 8वीं अतिरिक्त सिविल जज के पद पर हुआ है।
कर्मभूमि में हासिल किया मुकाम: शिल्पा के पिता भारतीय रेलवे में मुख्य टिकट निरीक्षक (CTI) के पद से सेवानिवृत्त/कार्यरत रहे हैं। गुजरात में रहते हुए शिल्पा ने लॉ की पढ़ाई पूरी की और अपनी कर्मभूमि में ही न्यायिक अधिकारी बनकर परिवार व गांव का नाम रोशन किया।
नारी शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक तीनों बेटियों की यह सामूहिक सफलता स्पष्ट संदेश देती है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प, धैर्य और मेहनत करने का जज्बा हो, तो बेटियां हर क्षेत्र में शीर्ष मुकाम हासिल कर सकती हैं। इन नव-नियुक्त महिला न्यायाधीशों को सर्वत्र बधाइयां और उनके उज्ज्वल न्यायिक भविष्य के लिए शुभकामनाएं मिल रही हैं।

