जब 15 साल के भारतीय खिलाड़ी ने दुनिया के नंबर-1 चेस मास्टर को हराकर सो जाना ही बेहतर समझा!
नई दिल्ली: सोचिए, आप दुनिया के सबसे महान शतरंज खिलाड़ी को हरा दें और किसी को बताए बिना चुपचाप जाकर सो जाएं! जी हां, ऐसा बेमिसाल और अनोखा स्वैग दिखाया है दिल्ली के 15 वर्षीय युवा शतरंज खिलाड़ी (कैंडिडेट मास्टर) वंदन अलंकार सवाई ने।
ऑनलाइन 'Chess.com' के प्रतिष्ठित 'टाइटल्ड ट्यूसडे' ब्लिट्ज़ टूर्नामेंट में वंदन ने 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन और दुनिया के नंबर-1 ग्रैंडमास्टर मैग्नस कार्लसन को 50 चालों में मात देकर शतरंज की दुनिया में तहलका मचा दिया है।
इस ऐतिहासिक मुकाबले के बेहद दिलचस्प किस्से:
खेलने का मूड नहीं था, माता-पिता के कहने पर बैठे: जिस रात यह इतिहास रचा गया, वंदन का टूर्नामेंट खेलने का बिल्कुल मन नहीं था। माता-पिता के बार-बार कहने और जिद करने पर वे अनिच्छा से बोर्ड पर बैठे थे।
50 चालों में कार्लसन को किया पस्त: सामने शतरंज के 'बेताज बादशाह' मैग्नस कार्लसन थे। लेकिन वंदन ने बेजोड़ एकाग्रता और सटीक रणनीति से महज 50 चालों में कार्लसन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
जीत के बाद कोई शोर नहीं, सीधे बेड पर: दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ी को हराने के बाद जहां कोई भी जश्न मनाता, वहीं वंदन ने न तो कोई चिल्लाहट दिखाई और न ही रात में परिवार को जगाया। मैच खत्म हुआ और वे चुपचाप जाकर सो गए—मानो कोई आम गेम खेला हो!
सुबह पिता ने देखी प्रोफाइल, तब उड़ा होश: अगली सुबह जब वंदन के पिता ने उनकी 'Chess.com' प्रोफाइल और मैच हिस्ट्री देखी, तब जाकर परिवार को इस ऐतिहासिक जीत का पता चला।
शांत रहकर इतिहास रचना और इतनी बड़ी सफलता के बाद भी ज़मीन पर टिके रहना ही असली चैंपियन की पहचान होती है। 15 साल के वंदन अलंकार सवाई के इस अद्भुत हुनर और बेमिसाल अंदाज़ को पूरा देश सलाम कर रहा है!

