नारियल फूटने से पहले फूटा नई कार का शीशा: नन्हे 'डॉन' ने शोरूम में ही कर दिया 'सेंसरशिप' का उद्घाटन
न्यूज डेस्क : नई गाड़ी खरीदने की खुशी, शोरूम में सजी फूल-मालाएं, मुंह मीठा करने की तैयारी और पूरे परिवार का सोशल मीडिया पर चमचमाती कार के साथ फोटो डालने का क्रेज—सब कुछ एकदम परफेक्ट चल रहा था। लेकिन किसे पता था कि परिवार का नन्हा चिराग डिलीवरी के शुभ मुहूर्त में ही अपनी 'स्वतंत्र सत्ता' का ऐलान कर देगा।
घटना के मुताबिक, डिलीवरी की रस्मों के दौरान बच्चे के हाथ में गाड़ी की दोनों चाबियाँ (मास्टर की और स्पेयर की) आ गईं। नन्हे 'नवाबजादे' ने फुर्ती दिखाते हुए कार के अंदर शाही एंट्री मारी और 'खट' से सेंट्रल लॉकिंग का बटन दबाकर खुद को कार के अंदर लॉक कर लिया।
जब पसीने छूट गए परिवार और शोरूम स्टाफ के
कार लॉक होते ही बाहर खड़े परिवार और शोरूम कर्मचारियों के हाथ-पाँव फूल गए। बाहर से कार खोलने का कोई रास्ता नहीं बचा था, क्योंकि इमरजेंसी चाबी भी अंदर बंद बच्चे की मुट्ठी में कैद थी।
शुरुआत में बाहर से इशारे करके बच्चे को लॉक खोलने के लिए समझाया गया, लेकिन बात बनने की बजाय अंदर से बच्चे का रोना शुरू हो गया। इमोशनल ड्रामा जब फुल वॉल्यूम पर पहुँचा, तो शोरूम स्टाफ ने भी हाथ खड़े कर दिए। आखिरकार भारी मन से फैसला लिया गया कि बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कार का शीशा तोड़ना ही पड़ेगा।
बिना सड़क पर उतरे ही 'एक्सीडेंटल' हुई कार
जिस नई-नवेली गाड़ी पर एक खरोंच भी मालिक का दिल दुखा देती, उसी के शीशे पर बेबसी का हथौड़ा चलाना पड़ा। डिलीवरी की पहली फैमिली सेल्फी खिंचने से पहले ही शोरूम के फर्श पर कांच के टुकड़े बिखर गए।
बच्चे को तो बिना किसी चोट के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन बिना एक किलोमीटर चले ही नई कार 'रिपेयरिंग' श्रेणी में आ खड़ी हुई। डिलीवरी का जश्न तो उस दिन के लिए टल गया, लेकिन इस अनोखी घटना ने परिवार और वहाँ मौजूद सभी लोगों को यह सबक जरूर दे दिया कि स्मार्ट फीचर्स वाली कार की चाबी और छोटे बच्चे—दोनों को एक साथ कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

