Panchayati Raj Elections 2026 : कौन लड़ सकेगा चुनाव और किसे देना होगा इस्तीफा?

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राजस्थान पंचायत चुनाव: 'लाभ के पद' को लेकर निर्वाचन आयोग के नए दिशा-निर्देश; जानिए किसे मिला मौका और किसे देना होगा इस्तीफा

जयपुर : राजस्थान में आगामी पंचायतीराज चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने 'लाभ के पद' (Office of Profit) की स्थिति को साफ कर दिया है। आयोग ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर्स (जिला निर्वाचन अधिकारियों) को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य पदों के नामांकन के दौरान प्रत्याशियों की पात्रता को लेकर कोई भ्रम न रहे।

राजस्थान पंचायत चुनाव अपडेट: संविदाकर्मी और आशा सहयोगिनी बिना इस्तीफे नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और राशन डीलरों को बड़ी राहत

1. संविदाकर्मी और आशा सहयोगिनी: चुनाव से पहले इस्तीफा अनिवार्य

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगिनी के पद सीधे तौर पर 'लाभ के पद' के दायरे में आते हैं।

  • नियम: इन पदों पर बने रहकर कोई भी व्यक्ति पंचायतीराज संस्थाओं का चुनाव नहीं लड़ सकता।

  • शर्त: यदि ये कार्मिक चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं, तो उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से पूर्व अपने पद से त्यागपत्र (इस्तीफा) देना होगा। साथ ही, नामांकन से पहले सक्षम स्तर से उनका इस्तीफा मंजूर होना भी आवश्यक है।

2. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और राशन डीलरों को बड़ी राहत

श्रेणीआयोग का रुख / छूटआधार एवं शर्त
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाबिना इस्तीफा दिए चुनाव लड़ सकती हैं।चुनाव अवधि के लिए 'विना वेतन अवकाश' (Leave Without Pay) लेना अनिवार्य होगा।
राशन डीलर (FPS Dealer)बिना किसी रुकावट के चुनाव लड़ने की पूरी अनुमति।राजस्थान हाईकोर्ट का 2014 का फैसला (मांगी देवी बनाम राजस्थान सरकार)—जिसमें राशन दुकान संचालन को लाभ का पद नहीं माना गया था।

3. विद्या संबल योजना और प्रशासक लगे सरपंचों पर रुख

  • विद्या संबल योजना: इस योजना के तहत कार्यरत शिक्षकों व कर्मियों को सरकार से मानदेय प्राप्त होता है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि रिटर्निंग अधिकारी (RO) अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र और सेवा शर्तों की जांच करेंगे। यदि किसी भी प्रकार का संशय होता है, तो चुनाव लड़ने से पहले उनका इस्तीफा लिया जाना तय किया जाएगा।

  • प्रशासक लगे पूर्व सरपंच: पंचायतों में प्रशासक के रूप में कार्यरत पूर्व सरपंचों के संदर्भ में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय (जया बच्चन बनाम भारत सरकार) का हवाला दिया है। अदालत के अनुसार, केवल वास्तविक आर्थिक लाभ पाना ही काफी नहीं है, बल्कि यह देखना होता है कि क्या पद वित्तीय लाभ देने में सक्षम है। अतः नियुक्ति, सरकारी नियंत्रण और मानदेय के आधार पर प्रशासकों को भी नामांकन से पहले पद छोड़ना पड़ सकता है।

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