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कुछ इस तरह से होता है भारत में लव जिहाद का संचालन

Image result for love jihad  नई दिल्ली।। इसको संचालित करने के लिये पाकिस्तान, या अरब देशों से इनको वहाँ के शेखों द्वारा भारी पैसा आता है जो कि तेल के कुओं के मालिक होते हैं। ये पैसा उनको All India Muslim Scholarship Fund के रूप में दिया जाता है। प्रतिमाह इन मुस्लिम गुंडों को तैयार किया जाता है और हिन्दू लड़कियों को फंसाने के लिये इनको 8000 से 0000 मासिक वेतन दिया जाता है। तो मस्जिदों में किसी मुहल्ले के सभी मुसलमानों की मीटिंग रखी जाती है। जिसमें भाग लेने वाले अमीर से लेकर गरीब तबके के लोग आते हैं, जिसमें रेड़ीवाला, शॉल बेचने वाले कशमीरी पठान, घरों में काम करने वाले, नाई, चमार आदि।
   इनको हिन्दू या सिक्ख ईलाकों में घूम घूम कर ये पता लगाने को कहा जाता है कि किस घर की लड़की जवान हो गई है। तो शाल बेचने वाले पठान ये नज़र रखते हैं। और फिर ये लड़कियों की लिस्ट बनाई जाती है और जिहादी गुंडे जो कि दिखने में हट्टे कट्टे हों उनको तैयार किया जाता है, मोटर साईकलें खरीद कर दी जाती हैं। जिनको मस्जिदों में रखा जाता है। तो ये युवक अपनी कलाईयों पर मौलीयाँ बाँध कर निकल अपने नाम बदल कर हिन्दू नाम रख लेते हैं और इन लड़कियों के पीछे पड़ जाते हैं और अगर कोई लड़की दो सप्ताह के भीतर नहीं फंसती तो फिर ये उसे छोड़ कर लिस्ट की दूसरी लड़की पर अपने जिहाद को आज़माने के लिये निकल पड़ते हैं। तो ऐसे ही पूरे मोहल्ले में से कोई न कोई लड़की लव जिहाद का शिकार हो ही जाती है।
   दूसरा तरीका ये है कि social networking sites जैसे कि faceook आदि पर ये लोग नकली Id या फिर अपनी असली Id से ही हिन्दू लड़कियों को request भेजते हैं। और जैसे कि इनकी training होती है वैसे ही ये लोग इन लड़कियों को फाँसने के लिये तरह तरह के message भेजते हैं। और वे लड़कियाँ इनके मोह जाल कसं फँसकर अपना सब कुछ गंवा देती हैं। 
ये लव जिहाद के ईनाम की घोषणा और संचालन कहाँ से होता है ?
   केरल का मालाबार ही इसका मुख्य संचालन स्थान है। परन्तु अब उसकी शाखायें पूरे भारत में फैल गई हैं। क्योंकि केरल में ही लव जिहाद के 5000 से अधिक मामले कोर्ट के सामने आये हैं। तो पूरे भारत में कितने ही ऐसे मामले होंगे ?
क्या लव जिहाद में केवल हिन्दू लड़कियों को ही लक्ष्य किया जाता है या अन्य को भी ?
   भारत में हिन्दू बहुसंख्यक हैं जिस कारण पहला लक्ष्य हिन्दू लड़कियाँ ही होती हैं। परन्तु इससे अतिरिक्त दूसरे मत (बौद्ध, जैन, वाल्मिकी, सिक्ख, ईसाई) की लड़कियाँ भी लक्ष्य की जाती हैं, क्योंकि ईस्लाम की विचारधार बहुत ही कुंठित और संकुचित है जिसमें कि दूसरे मत पंथों के विरुद्ध उग्र घृणा का भाव विद्यमान है, और स्त्रीयों को तो ईस्लाम जानवरों से भी बदतर समझता है।
हिन्दू लड़कियाँ लव जिहाद में ही क्यों फंस जाती हैं? क्या इनमें दिमाग नहीं होता ?
इसके ये मुख्य कारण हैं :-
(१) हिन्दू घरों में धार्मिक वातावरण नहीं रखता ।
(२) हिन्दू अपने बच्चों को वैिदक मत की श्रेष्ठता और अवैदिक मत की निकृष्टता नहीं बताता ।
(३) अपने इतिहास पुरुषों और स्त्रीयों की जीवनीयों और उनके बलिदानों को नहीं बताता।
(४) हिन्दू युवा अपने वीर योद्धायों से इतर बालिवुड के नायकों को अपना आदर्श मानता है ।
(५) घर में सास बहु के सीरियल चलने से वातावरण और दूषित हो जाता है ।
(६) हिन्दू अपने बच्चे को धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ाता है और मुसलमान अपने बच्चे को दूसरों के प्रती नफरत सिखाता है । जिस कारण ये हिन्दू लड़कियाँ मुसलमान लड़कों से घुलने मिलने में झिझकती नहीं ।
(७) फेसबुक पर ज्यादातर हिन्दू लड़कियों की प्रोफाईल देखेंगे तो उन्होंने धार्मिक पेजों की बजाये, love, tv serials, pyar, ishq, bollywood masala, mickel jakson, shahrukh ,salman, hritik आदि के पेज लाईक किये होते हैं । और उनकी friend list में मुसलमान युवकों की संख्या बहुत ही पायी जाती है।




(सारिका भारतीय)