नई दिल्ली।।
दिल्ली के अधिकतर सरकारी मकानों पर देश के बुजुर्ग और दिग्गज कलाकारों ने
कब्जा जमा रखा है, इनमें कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज, संतूर वादक भजन
सोपोरी जैसे बड़े नाम सम्मिलित हैं। नियमानुसार तीन वर्ष के लिए आवंटित
होने वाले टाईप-4 और 5 श्रेणी के इन सरकारी आवासों पर पिछले 36 सालों से इन
कलाकारों ने कब्जा जमा रखा है। कई पुराने कलाकारों की मौत के बाद भी उनके
परिजनों ने सरकारी आवास खाली नहीं किया है। सरकारी आवासीय व्यवस्था की
निगरानी करने वाला शहरी विकास मंत्रालय भी इन कलाकारों से सरकारी आवास खाली
कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। लेकिन हर छह महीने में मंत्रालय इन
मकानों को खाली करने का एक नोटिस अवश्य जारी कर देता है। पुराने लोगों के
मकान न छोड़ने से नई पीढ़ी के कलाकारों को सरकारी आवास नही मिल पा रहा है।
प्रतिष्ठित कलाकारों के लिए दिल्ली में 40 मकानों का कोटा है। इनमें से 27
पर कलाकार या उनके परिजनों का डेरा है।
जिन कलाकारों के पास राष्ट्रीय
राजधानी क्षेत्र में घर नहीं है और उनकी आमदनी बीस हजार प्रति माह से अधिक
नहीं है उन्ही कलाकारों को यह मकान देने का प्रावधान है। उन्हें यह घर तीन
साल के लिए दिया जाता है। विशेष हालात में अवधि तीन साल और बढ़ाई जा सकती
है। कलाकारों की मासिक आमदनी 20 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए। 2008 में
कैबिनेट की आवासीय समिति ने इसमें एक शर्त जोड़ दी कि कलाकार की उम्र 40-60
साल के बीच होनी चाहिए। उनकी मृत्यु होने पर परिजन छह माह में घर खाली कर
देंगे। नए कलाकारों के लिए मकान आवंटन को कमेटी हर छह माह पर बैठक करेगी।
समिति की अध्यक्षता संस्कृति मंत्रालय के सचिव करते हैं। मंत्रालय के
संयुक्त सचिव (संगीत नाटक अकादमी), ललित कला अकादमी, साहित्य अकादमी के
सचिव, नेशनल स्कूल आफ ड्रामा और संपत्ति विभाग के निदेशक सदस्य हैं।
