इलाहाबाद।। इलाहाबाद के अटाला क्षेत्र के मुस्तकीम अहमद उर्फ राजू (40) पेशे से प्रौपर्टी डीलर का काम करते हैं उन्हीं के पड़ोस में रहने वाला एक हिन्दू परिवार की हीरालाल (पेशे से राजगीर) रहते हैं। जिनकी पुत्री संतोषी (20) विगत 15 सालों से मुस्तकीम अहमद को राखी बांधा करती थी। संतोषी एक प्राइवेट संस्था में अध्यापिका है। जिसका विगत आठ सालों से प्रशान्त कुमार (पुत्र स्व॰ संतोष) से प्रेम चल रहा था।प्रशांत बीमा अभिकर्ता का काम करता है, लेकिन संतोषी के परिवार वाले उनकी शादी के खिलाफ थें। उसके बाद भी संतोषी ने प्रशान्त से कोर्ट में शादी तो कर ली थी। पर वह अपने परिवार के रजामंदी के बगैर प्रशान्त के साथ अपना जीवन बिताने को तैयार नहीं थी। जिससे यह परेशान सी रहने लगी मुस्तकीम अहमद को जब यह बात पता चली तो उन्होंने संतोषी के परिवार वालाें को उनकी रस्मों रिवाजों से शादी करवाने की बात रखी। पर संतोषी के परिवार वाले नहीं माने। मुस्तकीम अहमद ने अपनी मुंहबोली बहन के दर्द को भाप लिया था और उन्होंने ठान ली की वह अपनी बहन संतोषी को प्रशान्त से मिलाकर रहेंगे।
मुस्तकीम ने संतोषी और प्रशान्त को आर्य समाज के मंदिर के पास भुलाया व उनके वहां पहुंचने के बाद उन्होंने संतोषी व प्रशान्त के परिवार वालों को भी वहां बुलाया और कहा कि मैं अपनी बहन की जिन्दगी अपनी आंखों के सामने बर्बाद होते नहीं देख सकता, इसलिए मैं आज दोनों की शादी करवाने जा रहा हूं। यदि आप सबको आना हो तो आ जाएिये लेकिन आज मैं अपनी बहन को उसका प्यार दिलवाकर रहूंगा उसके लिए मुझे चाहे जो करना पड़े मैं करूंगा। दुनिया की कोई ताकत मुझे आज रोक नहीं सकती। मैं आज अपनी राखी का फर्ज अदा करके रहूंगा।
उसके बाद मुस्तकीम ने अपनी पत्नी व बच्चों को भी मंदिर पर बुलवाया और मंदिर में जाकर बकायदा हिन्दू धर्म के रस्मों रिवाज से संतोषी व प्रशान्त की शादी करवायी। मौके पर संतोषी की मां मंदिर आ गई पर उन्होंने इस शादी का विरोध नहीं किया, मुस्तकीम ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर संतोषी का कन्यादान किया और उन्हें खुश रहने की दुआ भी दी। शादी का सारा खर्च भी उन्होंने स्वयं ही उठाया और कहा कि बहन और भाई का रिश्ता दुनिया का सबसे मजबूत व सच्चा रिश्ता है जिससे कोई गैर मजहब न ही शरहद इसे कभी तोड़ सकती है।
